सोशल मीडिया पर इस समय पुलिस एक्शन की एक फोटो तेजी से वायरल हो रही है. फोटो में एक खाकी वर्दी वाला शख्स, एक आदमी को उसके बालों से घसीटता हुआ नजर आ रहा है. तस्वीर को इस तरह से पेश किया गया है कि ये उत्तर प्रदेश की है और उस वक्त की है जब सूबे के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे. पोस्ट में कहा गया है कि मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में पुलिस ने इस तरह से हिंदू संतों पर बर्बरता की थी.
पोस्ट में सीधे तौर पर किसी घटना का जिक्र नहीं किया गया है. लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में पुलिस और कारसेवकों के बीच हुई हिंसक झड़प की तरफ इशारा किया गया है. इस झड़प के दौरान पुलिस फायरिंग में कई कारसेवकों की मौत हो गई थी. उस वक्त यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ही थे.
क्या है तस्वीर की सच्चाई?
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. यह फोटो नवंबर 2009 में गुजरात के अहमदाबाद स्थित आसाराम 'बापू' के आश्रम में हुई एक पुलिस कार्रवाई के दौरान ली गई थी. इसका उत्तर प्रदेश या मुलायम सिंह यादव से कोई संबंध नहीं है.
तस्वीर के साथ एक ट्विटर यूजर ने कैप्शन में लिखा, "हमारे संतो का बाल पकड़ कर खिंचवाने वाला कोई जेहादी नही था,,,वो अखिलेश यादव का बाप था...याद है ना ??". इसी कैप्शन के साथ तस्वीर को फेसबुक और ट्विटर पर कई लोग शेयर कर चुके हैं.
कैसे पता की सच्चाई?
तस्वीर को येन्डेक्स पर रिवर्स सर्च करने से हमें आसाराम के आश्रम की आधिकारिक वेबसाइट पर 27 नवंबर 2009 को छपा एक लेख मिला. इस लेख में वायरल तस्वीर सहित कुछ अन्य तस्वीरें भी मौजूद हैं जिसमें पुलिस कुछ लोगों पर लाठियां बरसाती दिख रही है. लेख में बताया गया है कि किस तरह गांधीनगर पुलिस ने 27 नवंबर 2009 को आश्रम में तोड़फोड़ की थी और आसाराम के भक्तों को पीटा था.
इस मामले से जुड़ी हमें "द टाइम्स ऑफ इंडिया" और "एनडीटीवी" की खबरें भी मिलीं जो उसी वक्त प्रकाशित हुईं थीं. इन खबरों के अनुसार, आसाराम के आश्रम के साधक कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और जिले के कलेक्टर को इस बारे में ज्ञापन सौंपना चाहते थे. इन मीडिया रिपोर्ट्स में आश्रम में हुई दो बच्चों की रहस्यमयी मौत को लेकर सवाल उठाए गए थे. प्रदर्शन रैली के लिए साधकों को पुलिस की इजाजत मिल गई थी और यह तय हुआ था कि कलेक्टर से आश्रम के चार लोग मिलेंगे.
लेकिन इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. लाठीचार्ज के जवाब में आश्रम के साधकों ने पत्थरबाजी करना शुरू कर दी, जिसमें गांधीनगर एसपी सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.
इस हिंसा पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अगले दिन अहमदाबाद स्थित आश्रम में रेड मारी और 200 से भी ज्यादा साधकों को गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान पुलिस ने लाठी-डंडे भी चलाएं थे. यह कार्रवाई अहमदाबाद और गांधीनगर पुलिस ने मिलकर की थी.
खोजने पर हमें इस घटना को लेकर उस समय की कुछ वीडियो रिपोर्ट्स भी मिलीं. ये वीडियो 'आजतक' और आसाराम के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मौजूद हैं. इन वीडियोज में भी वायरल फोटो जैसे लंबे बाल वाले एक व्यक्ति को देखा जा सकता है जिसे पुलिस खदेड़ रही है.
जानकारी को पुख्ता करने के लिए हमने आश्रम की पीआरओ नीलम दुबे से भी बात की. नीलम ने "आजतक" से बातचीत में इस बात की पुष्टि कर दी कि वायरल फोटो 2009 में आश्रम में हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान ही ली गई थी. उनका कहना था कि यह व्यक्ति एक आश्रमवासी था जिसे पुलिस ने पीटना शुरू कर दिया था.
यहां हमारी तफ्तीश में यह बात साबित हो जाती है कि तस्वीर 12 साल पहले आसाराम के गुजरात स्थित आश्रम में हुई पुलिस कार्रवाई की है. फोटो को यूपी और मुलायम सिंह यादव से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है.
अर्जुन डियोडिया