मणिपुर में क्यों नहीं थम रही हिंसा, गृहमंत्री अमित शाह ने दिया ये जवाब

Agenda Aaj Tak 2024: एजेंडा आज तक 2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के बाद अपने पहले टीवी इंटरव्यू में मणिपुर हिंसा, वन नेशन वन इलेक्शन और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय दी. उन्होंने मणिपुर में नस्लीय हिंसा के पीछे की मुश्किलों को उजागर किया और चुनावी प्रणाली के सुधार पर विचार व्यक्त किए.

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गृह मंत्री अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:01 PM IST

Agenda Aaj Tak 2024: गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा चुनाव के बाद अपने पहले टीवी इंटरव्यू में एजेंडा आजतक के मंच पर पहुंचे. लोकसभा के बाद यह किसी भी मीडिया संस्थान को दिया गया पहला इंटरव्यू था. गृह मंत्री ने मणिपुर हिंसा को लेकर पूछे गए सवालों के भी जवाब दिए और कहा कि वहां नस्लीय हिंसा हो रही है. ये न आतंकी हैं और ना ही धर्म के आधार पर दंगे हो रहे. जब भी मणिपुर में नस्लीय हिंसा हुई, एक-डेढ़ साल तक चला है. कई बार तीन-तीन साल तक चला है. अब हिंसा कम हुई है और स्थिति ठीक हो जाएगी.

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मणिपुर में सीएम बदलने की डिमांड को लेकर सवाल पर अमित शाह ने कहा कि यह निर्णय पार्टी करती है. बदलेंगे तो उसके बाद का रिएक्शन क्या होगा, उसकी भी चिंता करनी होती है क्योंकि ये कम्युनिटी का संघर्ष है. सभी पहलुओं पर हम राय कर रहे हैं और इसका समाधान निकालेंगे.

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राजनीति में आरोप लगते हैं. हम तथ्य की राह देख रहे

अमेरिका के पड़ोसी कनाडा के लॉरेंस बिश्नोई को लेकर आरोप पर अमित शाह ने कहा कि विदेश मंत्री ने कहा है कि जो भी सबूत हो, सामने रखिए. हम कठोर कार्रवाई करेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं. राजनीति में आरोप लगते हैं. हम तथ्य की राह देख रहे हैं.

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वन नेशन, वन इलेक्शन पर क्या बोले अमित शाह?

वन नेशन वन इलेक्शन के रामनाथ कोविंद के विजन का जिक्र करते हुए अमित शाह से टाइम फ्रेम को लेकर भी सवाल हुआ. उन्होंने कहा कि टाइम फ्रेम को लेकर नहीं कहेंगे लेकिन हम जरूर करेंगे. हम जो भी स्टैंड लेंगे, घमंडिया गठबंधन ने ये तय किया है कि हम उसका विरोध करेंगे. राहुल गांधी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं कहें तो शायद वो इसका भी विरोध करें.

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शुरू में तीन चुनाव इसी पैटर्न पर हुए. केरल की सरकार बर्खास्त कर दी गई. वहीं से ये पैटर्न टूटा. फिर 1971 में मिड टर्म इलेक्शन करा दिए गए. यही से ये परिपाटी टूट गई. कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं. चुनाव का ज्यादातर काम शिक्षक करते हैं. शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की जगह मतदाता लिस्ट में सुधार और चुनाव ड्यूटी में रहते हैं. खर्चा जो होता है वो अलग. विरोध क्यों करते हैं, ये समझ नहीं आता. विरोध का कारण बता दें.

14 में भी मोदीजी थे. ओडिशा में चुनाव हम हार गए थे. 19 में भी मोदीजी थे, हम आंध्र प्रदेश में हार गए थे. आप जनता को क्या समझते हैं. जनता पर भरोसा होना चाहिए. आपको तो चुनाव लड़ने और लड़ाने में बड़ा मजा आता है. पांच साल में एक बार चुनाव होंगे तो बोर नहीं हो जाएंगे. इस सवाल पर अमित शाह ने कहा कि हम मजे के लिए नहीं, पार्टी को जिताने के लिए लड़ते हैं और मेरी पार्टी वैसे भी चुनाव जीत जाएगी.

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