केवल चुनाव की वजह से पद्मावती पर विवाद, रवीना बोलीं- सब ठीक हो जाएगा

भारत के नंबर वन न्यूज़ चैनल 'आजतक' के महामंच 'एजेंडा आजतक' के छठें संस्करण में दूसरे दिन 'देश का सिनेमा कैसा हो' में रवीना ने कहा, यह समझ नहीं आता हम यथार्थ से क्यों मुंह मोड़ लेते हैं.

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रवीना टंडन रवीना टंडन

वन्‍दना यादव

  • नई दिल्ली,
  • 02 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:49 PM IST

संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' पर जारी विवाद को रवीना टंडन ने राजनीतिक ड्रामा करार दिया. बॉलीवुड एक्ट्रेस ने कहा, यह कुछ दिनों बाद ख़त्म हो जाएगा. कहा, 'यह समझ नहीं आता हम यथार्थ से क्यों मुंह मोड़ लेते हैं. मुझे ऐसा लगता है कि इन चीजों का एक दौर होता है. इलेक्शन खत्म होने दीजिए सब ठीक हो जाएगा.' भारत के नंबर वन न्यूज़ चैनल 'आजतक' के महामंच 'एजेंडा आजतक' के छठें संस्करण में दूसरे दिन 'देश का सिनेमा कैसा हो' सेशन में रवीना अपने विचार रख रही थीं.  

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शनिवार को एक सवाल के जवाब में रवीना ने कहा, जब कोई आपदा या परेशानी आती है तो फिल्म इंडस्ट्री एक साथ है. पद्मावती पर भी हम एकजुट हैं. फिल्मकारों के खिलाफ माहौल नया नहीं. उन्होंने कहा, 'मजरूह सुल्तानपुरी को 1 साल 6 महीने की जेल हुई थी जब उन्होंने एक कविता लिखी थी. किशोर कुमार को बैन कर दिया गया था गाने और शो करने से. क्योंकि उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी के लिए कैंपेन करने से मना कर दिया था.

लोग डरा रहे हैं यह चिंताजनक

रवीना ने कहा, 'सवाल तो ये हैं कि धमकियां देने वाले लोग गिरफ्तार क्यों नहीं हुए? एक फिल्म (पद्मावती) का विरोध किया जा रहा है. बैन की मांग हो रही है. कोई क़ानून-संविधान से परे जाकर जान लेने की धमकियां दे रहा है. ये कैसे हो रहा है? उन्होंने सोनू निगम को जान से मारने की धमकी दी, भंसाली को धमकी दी, दीपिका को मारने की धमकी दी, ऐसा होने क्यों दिया जा रहा है? सहमत हूं कि आप विरोध कर रहे हैं और आपको इसका अधिकार है. लेकिन हेल्दी प्रोटेस्ट स्वीकार किया जा सकता है. इस तरह की हिंसा को नहीं. '

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हम दिखा क्या रहे हैं? हमारी फ़िल्में निडर हों

इतिहास के खराब पक्ष को दिखाए जाने के सवाल पर रवीना ने कहा, 'अगर आप डिजिटल देखते हैं तो मालूम होगा कि वहां किस तरह सच्चाइयों को दिखाते हैं. इसमें हिंसा है, सेक्स है राजनीति है, वह सबकुछ है जो इतिहास में है. लेकिन जब हम इतिहास के एक पक्ष 'जौहर' (पद्मावती में) को दिखाते हैं तो बुद्धिजीवी कहते हैं कि आप उसे महिमामंडित कर रहे हैं. अगर आप सती पर फिल्म बनाने जाए तो लोग कहेंगे कि महिमामंडित कर रहे हैं. जबकि उस जमाने में क्या होता था, आप बस उसे दिखाना चाहते हैं. हम ये चाहते हैं कि हमारी फ़िल्में निडर हों.'

फिल्मकार भी संवेदनशील

रवीना ने कहा, 'हम राजनेताओं की तरह ही संवेदनशील हैं. आप न्यू इंडिया की बात करते हैं, 21वीं शताब्दी की बात करते हैं, हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हैं. लेकिन वो लाइन कहां है जिसे खींचना चाहते हैं.' रवीना ने कहा, 'पद्मावती का विरोध गलत है. फिल्म में जौहर को महिमा मंडित नहीं किया गया है.  उस जमाने में क्या होता था इसे दिखलाने की कोशिश की गई है. जहां तक बात है तो हमारे राजा-महाराजा कोई दूध के धुले नहीं थे. वो कोई गंगा स्नान नहीं करके आते थे.'

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फिल्म इंडस्ट्री देश में सेकुलरिज्म का सबसे बेहतरीन उदाहरण

रवीना ने कहा, 'मैं छाती ठोककर कह सकती हूं कि हमारी इंडस्ट्री जो पहले थी और जो आज है, ये देश में सेकुलरिज्म का सबसे बेहतरीन उदाहरण है. मैं यहां काम करती हूं. मेरे पिता और पति भी यहीं काम करते हैं. मैं बताना चाहूंगी कि पूरी इंडस्ट्री एक साथ है.'

क्या आज 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' बनना मुमकीन है?

जब रवीना से पूछा गया कि आज के दौर में उनकी फिल्म मोहरा का गाना 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' बनना संभव है? उन्होंने जवाब दिया, 'मुझे नहीं मालूम. नुसरत से राइट्स लेकर ये गाना बनाया गया था. यूपी, लखनऊ या नॉर्थ की बात करें, यहां तक कि पाकिस्तान सब जगह लगभग एक ही कल्चर है. मेरी मां लखनऊ की हैं. वहां अमा यार तुम चीज बड़ी मस्त हो बेहद सामान्य बोली है. यही गाने में लिया गया था. रवीना ने कहा, 'काफी समय से हाइपर सेंसीटिव माहौल चल रहा है. किसी भी चीज में नुस्ख निकाल सकते हैं. फिल्मों का काम चीजों के चित्रण के जरिए मनोरंजन है कुछ स्थापित करना नहीं. उन्होंने सवाल किया- आखिर हमने क्यों कहा - तुम चौदहवी की चांद हो? ऐसे तो आप कुछ भी उठा नहीं सकते.

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