टीवी की बेहतरीन एक्ट्रेसेस में से एक किटू गिडवानी ने उस समय को याद किया जब टीवी को सिर्फ देखा ही नहीं जाता था, बल्कि उसे महसूस भी किया जाता था. उनकी यादें एक ऐसे दौर की झलक दिखाती हैं जब महिलाओं पर आधारित कहानियां न सिर्फ आम थीं, बल्कि कहानी कहने की रीढ़ थीं. किटू ने उस दौर के बारे में बात की जब टीवी पर महिलाएं असल समस्याओं को सुलझाती थीं.
'ओका बोका टीवी' के साथ बातचीत में किटू ने कहा, 'भारतीय महिला किरदारों की बात करें तो, हमें टीवी पर अब वैसी मजबूत महिलाएं देखने को नहीं मिलतीं जैसी पहले 'रजनी', 'शांति' या 'स्वाभिमान' में मेरा किरदार 'स्वेतलाना' थीं... मुझे अब वैसी महिलाएं नहीं दिखतीं. हमें अब वह मुख्य महिला किरदार नहीं दिखता, जो पूरे सीरियल को अपनी धुरी पर चलाए.' किटू ने कहा, और आज के दौर में महिला किरदारों को लिखने के तरीके में आए बदलाव की ओर इशारा किया.'
किटू ने अपने शुरुआती दिनों को याद कर कहा कि उन दिनों, हम सब अपनी पहचान तलाश रहे थे, और महिलाएं भी अपनी पहचान ढूंढ़ रही थीं. काम, शादी, आजादी और परिवार में भूमिकाओं से जुड़े सवालों पर उसी समय चर्चा हो रही थी, और टेलीविजन ने उसी अनिश्चितता को दिखाया. यह बहुत अलग-अलग तरह की कहानियों का दौर भी था.
अब सब धंधा बन गया है
जब किटू से आज के टेलीविजन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपनी बात बेझिझक कही. 'आज यह एक बिल्कुल अलग दुनिया है, और मैं अब इसमें काम नहीं करती क्योंकि इसकी क्वालिटी बहुत खराब हो गई है. लेकिन हर कोई इसे पसंद करता है. भारतीय मानसिकता में कुछ ऐसा है जो सास और बहू के बीच की इस बहुत ही खराब स्थिति को पसंद करता है.. मुझे इससे नफरत है. अब टेलीविजन को क्या हो गया है... अब सब धंधा बन गया है. किसी ने मुझसे कहा था, बस आंखें बंद करके काम करो, यह सब बस धंधा है.'
किटू गिडवानी का करियर
बता दें कि एक्ट्रेस किटू गिडवानी को पहली बड़ी पहचान 'तृष्णा' (1985) से मिली, जिसे आम तौर पर उनकी पहली बड़ी टेलीविजन भूमिका माना जाता है, जिसमें उन्होंने एक लीड रोल निभाया था. टेलीविजन के अलावा, किटू ने प्रियंका चोपड़ा की 'फैशन', किरण राव की 'धोबी घाट', आलिया भट्ट की 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर', आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर की 'ओके जानू' जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं.
हाल के कुछ सालों में, किटू गिडवानी ने टेलीविजन, फिल्मों और OTT पर बहुत सोच-समझकर काम किया है. उन्होंने ऐसे रोल चुने हैं, जिनमें सिर्फ शोहरत नहीं, बल्कि गहराई हो. टीवी पर उनकी मौजूदगी 'हम रहें न रहें हम' (2023) में देखने को मिली, जिसके जरिए लगभग दो दशकों के बाद उन्होंने टीवी पर वापसी की. उन्हें आखिरी बार 2025 में आई फिल्म 'मैडम ड्राइवर' में देखा गया था.
aajtak.in