कास्ट‍िंग काउच पर यामी गौतम ने दी स्ट्रगलर्स को सलाह

इंडिया टुडे वुमन समिट में एक्ट्रेस यामी ने कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की. उन्होंने कास्टिंग काउच पर स्ट्रगलर्स को सलाह दी.

यामी गौतम
ऋचा मिश्रा
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  • 27 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

इंडिया टुडे वुमन समिट एंड अवॉर्ड्स के सत्र माइ बॉलीवुड जर्नी: लिविंग ए मार्क में बॉलीवुड स्टार यामी गौतम ने शिरकत की. यामी ने यहां कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की, इनमें कर‍ियर का शुरुआती दौर से लेकर बॉलीवुड के स्ट्रगल जैसे कई मुद्दे शाम‍िल थे.

इवेंट में यामी ने कास्ट‍िंग काउच पर सख्त रवैया अपनाने की सलाह दी. सेशन में यामी से पूछा गया कि आजकल कई बार एक्ट्रेस अपने साथ इंडस्ट्री में हुए बुरे अनुभव शेयर करती हैं, आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ? इस पर यामी ने साफ कह द‍िया, मैंने ऐसी चीजों के बारे में सुना है लेकिन कभी फेस नहीं किया. मेरे साथ ऐसी चीजें कभी नहीं हुईं.

यामी की स्ट्रगलर्स को सख्त सलाह

यामी ने बताया जब इंडस्ट्री में आई तो मेरा कोई जानने वाला यहां नहीं था.  मैं शूट‍िंग सेट पर बुक लेकर जाती थी. जब फ्री टाइम मिलता मैं अपनी किताबें लेकर सेट पर बैठ जाती थी. यही मेरी सबके लिए सलाह होगी. दूसरा इंसान कैसा है ये आप अंदाजा नहीं लगा सकते, लेकिन दूरी बनाकर चलने में बुराई नहीं है. मैं यही कहूंगी कि हमेशा ग्रेसफुल और प्रोफेशनल ब‍िहेव करो. लोगों के साथ घुलना-मिलना ठीक है लेकिन हमेशा सर्तक रहें. ऐसा करने से आप उन लोगों से दूर रह सकते हैं, जो आपको बुरी नजर से देखते हैं.

मीड‍िया से नाराज हैं यामी...

यामी ने मीड‍िया पर भी सवाल उठाए, उन्होंने कहा, कई बार लोगा अपने साथ हुए बुरे हादसे पर बोलना चाहते हैं लेकिन वो चुप रहते हैं. इसकी एक बड़ी वजह मीड‍िया है. मीड‍िया कई बार इंफॉर्मेशन देने की बजाय ओप‍िन‍ियन देने लग जाती है. ऐसे में जो लोग अपनी बात रखना भी चाहते हैं वो सोचते हैं कि कैसे अपनी बात कहें, उन्हें डर लगता है. लेकिन यामी ने इस बात की खुशी जाह‍िर की, कम ही सही कई प्लेटफॉर्म हैं जहां अपनी बात बेबाकी के साथ कही जा सकती है.

नेपोट‍िज्म पर बोलीं यामी...

यामी गौतम ने कहा, अगर मैं स्टारकिड होती तो कभी यामी गौतम नहीं बन पाती. मुझे अपने परिवार से प्यार है. मैं जो भी हूं वो मेरे पैरेंट्स की वजह से हूं. नेपोट‍िज्म गलत नहीं लेकिन आपका टैलेंट तय करता है कि आप रहेंगे या नहीं. लेक‍िन स्टारकिड नहीं होने से आपका चैलेंज बढ़ जाता है. वो भी तब जब आपकी फिल्म अच्छा नहीं करती है. आपके पास काम करने के मौके कम हो जाते हैं.

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