लखनऊ में हुए लल्लनटॉप शो के आखिरी सेशन में ख्यात अभिनेता और सिंगर पीयूष मिश्रा, लैला मैं लैला फेम सिंगर पावनी पांडे और फिल्म न्यूटन का संगीत देने वालीं रचिता अरोड़ा ने शिरकत की.
इस दौरान तीनों कलाकारों ने अपनी जिंदगी के दिलचस्प अनुभव शेयर किए. पीयूष मिश्रा ने बताया कि किस तरह उन्होंने दसवीं क्लास में अपना नाम बदल लिया था. पहले उनका नाम प्रियकांत शर्मा था. इसलिए उन्हें लोग प्रिया-प्रिया कहकर चिढ़ाते थे. ये उन्हें पसंद नहीं आया और उन्होंने अपना नाम बदलकर पीयूष मिश्रा कर लिया. उन्होंने बताया कि उनसे लाइफ में हर काम हो गया, फिर चाहे वो हरमोनियम बजाना हो, गायकी हो या गीत लिखना हो या अदाकारी हो. उन्होंने कहा ये सब काम उनसे हो जाते हैं, लेकिन दो कप चाय नहीं बनती.
पीयूष ने कहा, 'मैं खुद को यंग मानता हूं और मैं यंग ही मरूंगा. मैं युवाओं के साथ उठना बैठना पसंद करता हूं. हाय-हैलो, सर ये सब पसंद नहीं है.' पीयूष ने बताया कि एक साल उन्होंने क्लासिकल सिंगिंग भी सीखी. उन्होंने अपने उस नाटक का भी जिक्र किया जिसका एनएसडी में काफी विरोध हुआ और उन्हें बैन कर दिया गया. ये नाटक था 'हेमलेट कभी बॉम्बे नहीं गया. अब पीयूष इसे उपन्यास की शक्ल में ला रहे हैं.
अनुराग से जबर्दस्त मन-मुटाव हुआ
अनुराग कश्यप से अपने रिश्तों में आई तकरार पर भी पीयूष मिश्रा ने बात की. उन्होंने कहा, अनुराग से कभी दोस्ती नहीं टूट सकती. वे उनके बेहद करीब हैं. अनुराग से उनका मन-मुटाव जरूर हुआ. बिना मन-मुटाव के कैसी दोस्ती? अब अनुराग काफी समय से मिले नहीं है. अनुराग से कभी दोस्ती खत्म नहीं हो सकती.'
जब अनुराग की आंखों में आए आंसू
न्यूटन और मुक्केबाज में अपना म्यूजिक देने वालीं रचिता अरोड़ा ने बताया कि उनकी अनुराग कश्यप से पहली मुलाकात कैसे हुई. उन्हें पता चला कि अनुराग को म्यूजिक कंपोजर खोज रहे हैं. उन्होंने अनुराग से समय मांगा और उनके ऑफिस मिलने पहुंच गईं. चूंकि रचिता देरी से ऑफिस पहुंची थीं, इसलिए उनका अनुराग से मिलना तब हुआ जब वे ऑफिस से निकल रहे थे. अनुराग ने कार में ही रचिता का म्यूजिक सुना. ये इतना इमोशनल था कि इसे सुनकर अनुराग के आंसू आ गाए. इस तरह रुचिता को मुक्केबाज में बतौर कंपोजर मौका मिला.
नर्सरी से ही गाना शुरू कर दिया था
लैला मैं लैला फेस सिंगर पावनी पांडे ने बताया कि वे नर्सरी से ही गाने लगी थीं. उनकी मां उनसे कहती थी, 'जब तू बोलना नहीं सीखी तब गुनगुनाया करती थी'. पावनी ने बताया कि उन्होंने यमन राग से अपनी गायकी सीखने की शुरुआत की थी.
महेन्द्र गुप्ता