अक्षय कुमार बॉलीवुड के एकमात्र सुपरस्टार हैं जो साल भर में तीन से चार फिल्में कर लेते हैं और उनके प्रोड्यूसर घाटे में नहीं रहते हैं. बेशक वे खान तिकड़ी की तरह 200-300 करोड़ रु. की कमाई की दौड़ में नजर नहीं आते हैं, लेकिन उनकी अधिकतर फिल्में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू ही लेती हैं, जिस वजह से प्रोड्यूसर नुकसान में नहीं रहते हैं.
अपनी इसी कामयाबी को देखते हुए अब अक्षय कुमार के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं. उन्होंने अब खान तिकड़ी (शाहरुख, सलमान और आमिर) से टक्कर लेने का इरादा बना लिया है. इसके लिए उन्होंने पहले शाहरुख खान को चुना. उनकी 'टॉयलेटः एक प्रेम कथा' शाहरुख खान की फिल्म के साथ 11 अगस्त को मुकाबला करेगी. दूसरी ओर खिलाड़ी कुमार मिस्टर परफेक्शनिस्ट से दीवाली पर भिड़ने जा रहे हैं. अक्षय की 'रोबोट-2' रिलीज होगी जबकि आमिर के प्रोडक्शन हाउस की 'सीक्रेट सुपरस्टार' भी रिलीज होने जा रही है. लेकिन मजेदार यह है कि वे शाहरुख और आमिर से लोहा लेने की हिम्मत तो दिखा पा रहे हैं लेकिन सलमान के सामने आने की हिम्मत अब तक उनकी नहीं हुई है.
आइए जानते हैं खिलाड़ी कुमार की कामयाबी के क्या हैं पांच मंत्र...
कम बजट, मोटी कमाई
अक्षय कुमार की फिल्मों का बजट खान तिकड़ी की फिल्मों के बजट से कम रहता है, और अधिकतर फिल्मों के प्रोड्यूसर भी वे खुद ही होते हैं. फिर उनके ऊपर 200-300 करोड़ रुपये की कमाई का प्रेशर नहीं होता है. इसके साथ ही वे साल में तीन-चार फिल्में करते हैं तो उनकी कुल कमाई भी काफी हो जाती है और कहा जाता है कि अगर अक्षय जैसे स्टार न हों तो फिल्म इंटस्ट्री कैसे चलेगी.
अनुशासित खिलाड़ी
अक्षय कुमार की खासियत उनका अनुशासन है. वे लेट-लतीफी में यकीन नहीं करते हैं और अपने प्रोजेक्ट को समय पर खत्म करना अपना पहला कर्तव्य मानते हैं. तभी तो 'जॉली एलएलबी-2' की शूटिंग उन्होंने 40 दिन के भीतर ही खत्म कर डाली थी. अगर वे ऐसा न करें तो एक साल में तीन-चार फिल्में करना उनके लिए आसान नहीं रहेगा.
रंग-बिरंगे अक्षय
अक्षय कुमार की फिल्मों को लेकर चॉयस में डिफ्रेंट शेड्स नजर आते हैं. पिछले कुछ समय में उन्होंने फिल्मों को लेकर अपनी चॉयस में इन शेड्स को दिखाया भी है. साल 2016 में उन्होंने 'रुस्तम' और 'एयरलिफ्ट' जैसी संजीदा फिल्में भी की तो इसके साथ ही 'हाउसफुल-3' जैसी कॉमेडी फिल्म भी उनके नाम दर्ज थी. जबकि 2017 की शुरुआत वे 'जॉली एलएलबी-2' जैसी सार्थक फिल्म के साथ कर चुके हैं.
बायोपिक से बढ़ रहा है कद
उन्होंने 'रुस्तम' और 'एयरलिफ्ट' जैसी फिल्में क्या कीं दर्शकों के बीच उनकी हंसोड़ अक्षय वाली इमेज एकदम खत्म हो गई. उससे पहले तक उन्हें सिर्फ कॉमेडी फिल्मों के लिए पहचाना जाता था. लेकिन 'रुस्तम' और 'एयरलिफ्ट' में की गई सीरियस एक्टिंग ने उन्हें नई पहचान दिलाई है. उनकी आने वाली फिल्म 'पैडमैन' भी असल जिंदगी से प्रेरित कहानी है. यानी अक्षय मनोरंजन के साथ संदेश का सही मिक्सचर लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
बैनर की नहीं परवाह, नये लोगों का साथ
अक्षय कुमार कभी भी किसी बैनर के साथ बंधकर नहीं रहे हैं. इस बात को उनकी हालिया फिल्मों में देखा जा सकता है. वे खुद भी प्रोड्यूसर हैं और अक्सर वे नए डायरेक्टरों को अपनी फिल्मों में मौका देने में यकीन करते हैं. टीनू सुरेश देसाई (रुस्तम), राजा कृष्ण मेनन (एयरलिफ्ट) और श्रीनारायण सिंह (टॉयलेटः एक प्रेम कथा) जैसे अधिकतर डायरेक्टर एक या दो फिल्म पुराने ही हैं.
नरेंद्र सैनी