Movie Review: जिंदादिली की निशानी है अमिताभ-ऋषि की '102 नॉट आउट'

एक्टर, राइटर, डायरेक्टर उमेश शुक्ला ने ढूंढते रह जाओगे, ओह माय गॉड और आल इज वेल जैसी फिल्में डायरेक्ट की हैं. ओह माय गॉड के लिए उन्हें बहुत सराहा भी गया है. अब मशहूर गुजराती प्ले पर आधारित फिल्म उमेश ने बनाई है, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री के दो बड़े दिग्गज अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर अभिनय कर रहे हैं.

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अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर

अनुज कुमार शुक्ला / आरजे आलोक

  • मुंबई ,
  • 03 मई 2018,
  • अपडेटेड 12:20 PM IST

फिल्म का नाम : 102 नॉट आउट

डायरेक्टर: उमेश शुक्ला

स्टार कास्ट: अमिताभ बच्चन , ऋषि कपूर , जिमित त्रिवेदी

अवधि:1 घंटा 42 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 4 स्टार

एक्टर, राइटर, डायरेक्टर उमेश शुक्ला ने ढूंढते रह जाओगे, ओह माय गॉड और आल इज वेल जैसी फिल्में डायरेक्ट की हैं. ओह माय गॉड के लिए उन्हें बहुत सराहा भी गया है. अब मशहूर गुजराती प्ले पर आधारित फिल्म उमेश ने बनाई है, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री के दो बड़े दिग्गज अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर अभिनय कर रहे हैं. फिल्म की कहानी सौम्य जोशी ने लिखी है, जो आमिर खान की पीके, 3 इडियट्स जैसी और जल्द रिलीज होने वाली फिल्म संजू के राइटर अभिजात जोशी के भाई हैं. आइए जानते हैं, आखिर कैसी बनी है यह फिल्म...

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कहानी

फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाले 102 साल के दत्तात्रेय जगजीवन वखारिया (अमिताभ बच्चन) और उनके 75  साल के बेटे बाबूलाल दत्तात्रेय वखारिया  (ऋषि कपूर) की है.  दोनों मुंबई के विले पार्ले स्थित शांति निवास में रहते हैं. एक दिन जब दत्तात्रेय को पता चलता है की चीन के रहने वाले ओंग चोंग तुंग के पास 118 साल तक जीने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, तो वो इस रिकॉर्ड को तोड़ने का मन बनाते हैं. इसके लिए दत्तात्रेय अपने 75  साल के बेटे को वृद्धाश्रम भेजने का प्रस्ताव रखते हैं. जब वो जाने के लिए मना करता है तो धीरू (जिमित त्रिवेदी) के साथ मिलकर दत्तात्रेय, बाबूलाल के सामने एक के बाद एक शर्तें रखते जाते हैं, जिन्हे बाबूलाल पूरा करता है. अब क्या दत्तात्रेय वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ पाते हैं, कहानी में क्या ट्विस्ट-टर्न्स आते हैं? ये सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

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आखिर क्यों देखें?

फिल्म के नाम के अनुसार यह मात्र 102 मिनट की फिल्म है और जिस तरह से 3 लोगों को लेकर उमेश ने पूरी कहानी सुना डाली है वो काबिल-ए- तारीफ़ है. फिल्म की लिखावट जबरदस्त है और स्क्रीनप्ले भी बढ़िया. संवाद ऐसे हैं जिन्हें सुनकर आप हंसते भी हैं और दुःख में भी आपके चेहरे पर मुस्कान नजर आती है. ऐसी कहानी के लिए उमेश बधाई के पात्र हैं. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की एक्टिंग के लिए कुछ भी लिखना कम होगा. दोनों ही बहुत उम्दा अभिनय करते नजर आते हैं और कहानी को अलग ही लेवल पर लेकर जाते हैं. गुजराती फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता जिमित त्रिवेदी ने भी बढ़िया अभिनय किया है. फिल्म की खासियत है कि इसे परिवार के साथ देखा जा सकता है और इसमें कई ऐसे मोमेंट्स हैं जो आपको परिवार की याद दिलाते हैं. फिल्म देखने के बाद कई लोग अपने माता-पिता या बच्चों को फ़ोन करते हुए नजर आ सकते हैं. फिल्म कनेक्ट करती है.

कमजोर कड़ी

फिल्म की रफ़्तार थोड़ी स्लो है और अगर आप लॉजिक लगाने की कोशिश करेंगे तो शायद आपको ये पसंद ना आए.

बॉक्स ऑफिस

फिल्म का बजट लगभग 25 करोड़ बताया जा रहा है. फिल्म की ओपनिंग अच्छी लगने के चांसेस हैं. माना जा रहा है कि फिल्म अच्छा बिजनेस करेगी. वर्ड ऑफ़ माउथ भी इसको दर्शकों के साथ जोड़ सकता है.

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