मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है. मुंबई की मिसाल भी दी जाती है, क्योंकि बम धमाकों से लेकर प्राकृतिक आपदाओं तक काफी कुछ सहने के बावजूद ये शहर कभी झुकता नहीं है, थकता नहीं है, रुकता नहीं है.
बीते दिनों यहां हुए एसफिंस्टन ब्रिज हादसे के बाद भी नजारा कुछ ऐसा ही था. एक तरफ हादसे को लेकर लोग दुखी थे, तो दूसरी तरफ मुंबई की फाइटिंग स्पिरिट की तारीफ हुई. मगर इस सबके बीच एक शख्स ऐसा था, जिसने इस घटना को एक फिल्म की शक्ल में पेश करना ज्यादा बेहतर समझा.
यहां देखें फिल्म
पुणे के संदीप चौहान ने मुंबई में अब तक हुए तमाम हादसों और उसके बाद मुंबई की जिंदादिली को लेकर एक फिल्म बनाई है. फिल्म मराठी में ही है. इसमें आतंकी हमलों, बम धमाकों, बारिश का कहर, ब्रिज हादसा समेत तमाम उन दुर्घटनाओं का जिक्र है, जिनके बाद लगा था कि ये शहर अब फिर से कभी खड़ा नहीं हो पाएगा.
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रायगढ़ के अलीबाग शहर में पले-बढ़े संदीप के लिए मुंबई बचपन से ही पसंदीदा शहर था. मुंबई की जिंदगी, यहां के लोग उन्हें हमेशा से पसंद थे. लेकिन अपने सपनों के इस शहर को बार-बार हादसों का शिकार होते देख संदीप काफी संजीदा हो जाते थे. हाल ही में हुए एलफिंस्टन ब्रिज हादसे ने जैसे उनकी सहनशीलता की हद पार कर दी और उन्होंने फिल्म बनाने का सोचा. फिल्म का नाम है मुंबईकर क्या सुपरमैन हैं. इसे लेकर उन्होंने एक दर्द भरी कविता भी लिखी है.
पहले जब उन्होंने फिल्म बनाने के खर्च का अंदाजा लगाया, तो वो उनके बजट से बाहर था.फिर उन्होंने अपने दोस्तों की मदद से फिल्म बनाकर पूरी की. बताया जा रहा है कि चार अक्टूबर को संदीप ने ये फिल्म पूरी बनने के बाद यू-ट्यूब पर शेयर की. यहां से एक स्थानीय पत्रिका ने इस फिल्म को अपने फेसबुक पेज पर शेय़र किया. यहां इसे चार दिनों में पांच लाख व्यू मिल चुके हैं.
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