भगवान दादा को एक ट्रेंड सेटर के रूप में याद किया जाता है. उन्होंने 30-40 के दशक में भारतीय सिनेमा में काफी बदलाव लाए. उनकी डांसिंग स्टाइल, कॉमेडी और खास अंदाज ने सभी का दिल जीत लिया था. उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन की कुछ खास बातें.
1. भगवान दादा की पहली डायलॉग फिल्म 'हिम्मत-ए-मर्दा' (1934) थी, जिसमें ललिता पवार उनकी हीरोइन थी. एक सीन के दौरान गलती से भगवान दादा ने ललिता पवार के छप्पड़ मार दिया था, जिस वजह से वे डेढ़ दिन तक कोमा में रही थीं. इसका असर ताउम्र उनकी आंख पर नजर आया.
2. भगवान दादा शेवरले कारों के शौकीन थे और उन्होंने 'शेवरले' टाइटल नाम की फिल्म में भी काम किया था.
3. 1947 के दंगों के दौरान उन्होंने सभी मुस्लिम कलाकारों और टेक्निशियन को आश्रय दिया.
4. भगवान दादा ने भारत की पहली हॉरर फिल्म 1949 में 'भेड़ी बंगला' बनाई थी.
5. भगवान दादा हॉलीवुड फिल्म एक्टर डगलस फेयरबैंक के फैन थे. वह बिना किसी बॉडी डबल के अपने स्टंट खुद ही करते थे. उनके स्टंट इतने असली लगते थे कि राज कपूर उन्हें इंडियन डगलस कहते थे.
6. उनके द्वारा निर्देशित और निर्मित फिल्म के एक सीन में उन्हें पैसों की बारिश दिखानी थी तो उन्होंने इसके लिए असली नोटों का इस्तेमाल किया था.
7. भगवान दादा की फिल्मों के नेगेटिव मुंबई के गोरेगांव में स्थित उनके गोदाम में रहते थे. लेकिन उसमें आग लग गई और 1940 के दशक तक की उनकी सारी फिल्में उसमें जल गईं.
8. म्यूजिक डायरेक्टर सी. रामचंद्र उनके दोस्त थे और उन्होंने उन्हें पहला ब्रेक भी दिया था.
9. फिल्म इंडस्ट्री में डांसरों की कमी की वजह से भगवान दादा ने 'अलबेला' के गाने 'शोला जो भड़के' में फाइटर्स का इस्तेमाल किया था.
10. चेंबूर के आशा स्टूडियो कैंपस में उनका एक बंगला था, लेकिन वह उसमें कुछ ही दिन रहे, वह अपने निधन के समय तक दादर के अपने पुराने मकान में रहे, उन्हें वहां रहना बेहद पसंद था.
11- साल 2016 में एक अलबेला के नाम से एक मराठी फिल्म बनी. इसमें भगवान दादा के जीवन के बारे में बताया गया. फिल्म में मंगेश देसाई ने भगवान दादा का रोल प्ले किया. इसमें विद्या बालन ने गीता बाली का किरदार निभाया.
पुनीत उपाध्याय