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12 साल की उम्र में क्यों सुसाइड करना चाहती थीं आल‍िया की बहन?

ऋचा मिश्रा
  • 11 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST
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फिल्म 'द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी' की रिलीज के लिए तैयार दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट का कहना है कि हमारे देश में मानसिक बीमारी के बारे में जागरुकता की कमी है. महेश भट्ट ने सोमवार को फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर इस गंभीर व‍िषय पर बात की.

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इस दौरान महेश भट्ट ने बताया,"मानसिक बीमार‍ियों को लेकर हमारे देश में जागरुकता बहुत कम है. मैनें अपने घर में अपनी बेटी शाहीन के साथ ये सब होते देखा है. "

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महेश भट्ट ने कहा, "जब शाहीन 12 साल की उम्र के करीब थी. तब वह क्लीन‍िकल ड‍िप्रेशन से गुजर रही थी. इन सब से बाहर न‍िकलने के लिए उसने बहुत स्ट्रगल किया."

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उन्होंने बताया, "एक वक्ता ऐसा आ गया था, जब वो सुसाइड करना चाहती थी. इस बारे में शाहीन ने भी प‍िछले द‍िनों एक आर्ट‍िकल ल‍िखकर बताया कि कैसे वो 12-13 साल की उम्र के दौरान सुसाइड करना चाहती थी."

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शाहीन ने अपने आर्टिकल में लिखा था, "मैंने एक से ज्यादा बार आत्महत्या की कोशिश की. मुझे असंतोष और पीड़ा से भरे जीवन की दहशत पर सोचने का अनुभव है. मैं खुद को डरावने विचारों में डुबा चुकी थी. मेरे पास असहनीय और अंधकारमय भविष्य से बचने का यही जरिया था." शाहीन ने लिखा, "मुझे चिंता है कि मेरी पहचान हमेशा मेरी बीमारी से जुड़ी रहेगी. मुझे हमेशा निराश लड़की के रूप में जाना गया है और कुछ भी नहीं."

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इस बारे में एक इंटरव्यू में आल‍िया ने कहा था, "शाहीन पिछले कुछ समय से अपने डिप्रेशन को लेकर फैमिली में खुली हैं और इसके लिए थैरपी सेशन भी अटेंड कर रही हैं. उन्होंने बताया कि शाहीन इन्सोम्निया डिसऑर्डर का भी शिकार हैं और उन्होंने कई रातें बिना सोए केवल बातचीत करते बिताई हैं."

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समाज में आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बारे में बात करते हुए भट्ट ने कहा, "यह मानसिक बीमारी का एक रूप है और इसका इलाज किया जा सकता है. जब आप मधुमेह से पीड़ित होते हैं, तो आपको इंसुलिन शॉट लेना पड़ता है." उन्होंने कहा, "इसी तरह जब आप अवसाद की ओर बढ़ते होते हैं तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने की आवश्यकता होती है, जो मेडिटेशन से आपका इलाज करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे देश में मानसिक बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी है. लगभग हर घर में लोग अवसाद से पीड़ित हैं."

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