शोबिज की दुनिया में अक्सर कोई न कोई भेदभाव का शिकार होता है. लेकिन पंचायत सीजन 4 फेम विनोद सूर्यवंशी की कहानी थोड़ी जुदा है. कहा बहुत जाता है कि देश में जातिगत भेदभाव नहीं है. लेकिन विनोद बचपन में ही इसका सामना कर चुके हैं. उन्होंने हाल ही में इसका जिक्र किया कि कैसे भरे होटल में उन्हें तिरस्कार सहना पड़ा.
भेदभाव का शिकार हुए विनोद
विनोद ने पंचायत में नए सचिव की छोटी-सी भूमिका निभाई थी, बावजूद इसके उन्हें पहचान मिली. एक्टर लंबे समय से अपनी पहचान बनाने की कोशिश में हैं. वो जानवर, थामा, सत्यमेव जयते और जॉली एलएलबी 3 जैसी कई फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं.
अपने साथ हुए भेदभाव का जिक्र उन्होंने सिद्धार्थ कनन से बातचीत में किया. विनोद ने कहा कि- मेरे कर्नाटक के गांव में आज भी जातिवाद मौजूद है. वहां गांव दो हिस्सों में बंटा है- एक ऊंची जाति के लोगों के लिए और एक नीची जाति के लोगों के लिए. दलितों का इलाका अलग है.
उन्होंने एक घटना याद करते हुए कहा- जब मैं 12 साल का था और अपने पिता के साथ गांव गया था, तो हम एक होटल में खाना खाने गए. वहां हमें खुद ही अपनी प्लेट धोनी पड़ी और खाने के पैसे भी देने पड़े. आज भी हमारे गांव में एक मंदिर है, जहां हमें अंदर जाने की इजाजत नहीं है. बचपन में हुई इस घटना का विनोद के मन पर गहरा असर पड़ा. अलग जाति की वजह से उन्हें और उनके पिता को सरेआम शर्मसार होना पड़ा था.
कभी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे विनोद
आजतक से बातचीत में विनोद ने इंडस्ट्री में अपने स्ट्रगल के बारे में बात की था. उन्होंने बताया था कि वो तकरीबन 10 साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं. मुंबई शहर में रहने के बाद भी अपने सपनों को पूरा करना यहां आसान नहीं होता. विनोद की शुरुआत सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी से हुई थी. वो रात में जॉब करते, दिन में ऑडिशन देते थे.
विनोद बताते हैं कि मेरी पहली कमाई बतौर जूनियर आर्टिस्ट सिर्फ 500 रुपये, साथ में खाना भी मिलता था. सालों काम करने के बाद ये बढ़ गई. मैंने 100 से ज्यादा एड में काम किया या, 10 से 12 वेब सीरीज की हैं. अभी एक रोल के अगर मैं रोजाना काम करूं तो डेली के 50 हजार मिलने लगे हैं. अब बैकअप भी तैयार कर लिया है, कम से कम जो रोल पसंद नहीं आए तो डायरेक्टर को कह सकूं कि ये नहीं जम रहा है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क