पाकिस्तानी ड्रामा की कहानियां इंडिया समेत कई देशों में काफी पसंद की जाती हैं. इनमें दिखाया गया फैमिली ड्रामा और स्टोरी लोगों के दिलों को हमेशा छूने का काम करती है. लेकिन हाल ही में पाकिस्तान की एक राइटर बी गुल ने सेंसर बोर्ड पर तीखे सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि सेंसर बोर्ड कुछ मामलों में काफी हिपोक्रेसी दिखाता है, जो कंटेंट क्रिएशन के लिए सही नहीं है.
बी गुल ने नादिया खान और जोएब अहमद के टॉक शो पर अपने ड्रामा सीरियल 'एक और पाकीजा' को लेकर हुई सेंसरशिप पर बात की. उन्होंने कहा कि उनके सीरियल में एक सीन के अंदर मेल लीड बिना कपड़ों के था. मगर उन्होंने उसका सिर्फ कंधा दिखाया. जब सेंसर बोर्ड ने इसे देखा, तो उन्होंने राइटर को उस एक्टर के कंधों को ब्लर करने का आदेश दिया. उनके शो को सख्त सेंसरशिप का सामना करना पड़ा.
सेंसरबोर्ड की हिपोक्रेसी से खफा राइटर
राइटर बी गुल के मुताबिक, वो सीन ड्रामा सीरियल में काफी अहम था.वो अपने सीन से जबरदस्ती और ब्लैकमेल जैसी सेंसिटिव कहानी दिखाना चाहती थीं. गुल ने इसकी तुलना उन दूसरे ड्रामा शोज से की, जहां मेल एक्टर्स को आसानी से शर्टलेस दिखाए जाता है. वो सीन सिर्फ दर्शकों को लुभाने के लिए होता है. राइटर ने कहा कि ऐसे सीन तो ऑडियंस भी पसंद करते हैं और सेंसर बोर्ड भी आसानी से पास कर देता है.
बी गुल ने सवाल उठाए कि जो कहानियां गंभीर मुद्दों पर बात करती हैं, उनपर इतनी रोक-टोक क्यों की जाती है. जबकि लड़कों के शरीर को ऑब्जेक्ट की तरह दिखाने वाले सीनों को तो खुले आम सेलिब्रेट किया जाता हैं. राइटर के मुताबिक, ये फर्क पाकिस्तान के एंटरटेनमेंट जगत की एक बड़ी परेशानी को दिखाता है. वहां मुश्किल या असहज मुद्दों पर बनी कहानियों पर ज्यादा सख्ती की जाती है
राइटर ने इंडस्ट्री में लोगों से अपील भी की. उन्होंने कहा, 'ऑडियंस की पसंद और इंडस्ट्री की आदतें, दोनों ने मिलकर इस फर्क को बढ़ावा दिया है. मेरी सभी लोगों के अपील है कि टीवी कंटेंट को अब किस दिशा में ले जाना है, इसके बारे में सोचने की जरूरत है.' बात करें बी गुल की, तो वो पाकिस्तानी सिनेमा की जानी-मानी स्क्रीनराइटर-डायरेक्टर हैं. उन्हें अपने काम के लिए अवॉर्ड्स भी मिल चुके हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क