Movie Review: अच्छी कॉमेडी का स्वाद लिए है बरेली की बर्फी

अक्षय कुमार की टॉयलेट एक प्रेम कथा की धूम के बीच में क्या बरेली की बर्फी का स्वाद थिएटर में जाकर लेना चाहिए. जानते हैं रिव्यू के साथ...

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बरेली की बर्फी बरेली की बर्फी

मेधा चावला

  • मुंबई,
  • 18 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

फिल्म का नाम : बरेली की बर्फी

डायरेक्टर: अश्विनी अय्यर तिवारी

स्टार कास्ट: राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना, कृति सैनन, पंकज त्रिपाठी, सीमा पाहवा

अवधि:2 घंटा 02 मिनट

सर्टिफिकेट: U /A

रेटिंग: 3 स्टार

एड एजेंसी के बैकग्राउंड में काम कर चुकीं अश्विनी अय्यर तिवारी की पहली फिल्म निल बटे सन्नाटा को ही काफी सराहा गया था. हालांकि बिजनेस के हिसाब से वह फिल्म नहीं चल पायी थी. लेकिन बरेली की बर्फी के साथ अश्विनी ने छोटे शहर की कहानी के साथ इस बार थोड़ी ज्यादा कमर्शल फिल्म बनाई है. देखते हैं ये कितनी कमाई कर पाती है!

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छोटे शहर की बिट्टी की कहानी

यह कहानी बरेली के रहने वाले मिश्रा परिवार की है जिसमें बिट्टी (कृति सैनन) अपने माता (सीमा पहवा) और पिता (पंकज त्रिपाठी ) के साथ रहती है. बिट्टी के मां-बाप उसकी शादी कराना चाहते हैं लेकिन लड़केवालों की ओर से बार-बार अजीब से सवाल पूछे जाने की वजह से बिट्टी घर से भागने का प्रयास करती है.

इसी बीच उसके हाथ बरेली की बर्फी नामक किताब लगती है और उसके लेखक प्रीतम विद्रोही (राजकुमार राव) से उसे मन ही मन प्यार हो जाता है. फिर प्रीतम की तलाश में बिट्टी की मुलाकात प्रिंटिंग प्रेस के मालिक चिराग दुबे (आयुष्मान खुराना) से होती है. इन्हीं मेल-मुलाकातों के साथ कहानी आगे बढ़ती है और जैसा कि ट्रेलर से ही जाहिर होता है- लव ट्राइएंगल बनता है.

किसमें है बरेली की बर्फी का स्वाद

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अश्विनी अय्यर तिवारी का डायरेक्शन काफी अच्छा है और लोकेशंस के लिहाज से लगता है कि आप उसी शहर में मौजूद हैं जहां यह पूरी कहानी घट रही है. कैमरा वर्क बढ़िया है और शूटिंग का तरीका भी अच्छा है.

फिल्म के डायलॉग्स की खासतौर पर तारीफ की जानी चाहिए जो लगातार दर्शकों को हंसाते हैं. कई जगह तो सीन खत्म होने के बाद भी चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है. पंकज त्रिपाठी और सीमा पाहवा ने पेरेंट्स के रूप में बेहतरीन काम किया है और हमेशा की तरह इस बार भी हंसाने के साथ-साथ दिल जीतने में भी कामयाब होते हैं.

वहीँ बिल्कुल ही अलग अवतार में लगी हैं और इस फिल्म के बाद उन्हें अलग तरह के किरदारों के लिए जरूर चुना जाएगा. हालांकि कई जगह वह कंगना रनोट को कॉपी करती दिखती हैं. वहीं इस तरह की फिल्मों में आयुष्मान खुराना पहले भी जमते रहे हैं और इस बार भी उनका काम सहज है. लेकिन बेस्ट कहे जाएंगे राजकुमार राव. उनके कई सारे पंच ऐसे हैं जो आपको आखिर तक याद रह जाते हैं.

जहां तक गानों की बात है तो फिल्म का संगीत ठीक है और खासतौर पर स्वीटी तेरा... सॉन्ग फिल्म की रिलीज से पहले हिट है. ट्विस्ट कमरिया की सुनने लायक है. लेकिन कंप्लीट अलबम के तौर पर बरेली की बर्फी बहुत याद किए जाने वाला संगीत नहीं देती है.

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यहां खराब होता है टेस्ट

का क्लाइईमैक्स काफी प्रेडिक्टेबल है. इसे और कसा जा सकता था. दूसरे हिस्से में फिल्म थोड़ा बोर करती है. लंबाई को बेवजह न बढ़ाकर इसे दुरुस्त किया जा सकता था.

बॉक्स ऑफिस के आंकड़े

फिल्म का बजट 20 से 25 करोड़ बताया जा रहा है और साथ ही टॉयलेट एक प्रेमकथा पहले से ही कई थियेटर में चल रही है. लेकिन बाहुबली जैसी फ़िल्मों के डिस्ट्रिब्यूटर अनिल थडानी के होने की वजह से फिल्म को अच्छी रिलीज मिलने की उम्मीद है. अगर दर्शकों की सही तारीफ मिली तो फिल्म के अच्छी कमाई करने की पूरी गुंजाइश है.

 

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