फिल्ममेकर वेत्रिमारन हाल ही में 'नीलीरा' के ट्रेलर लॉन्च में शामिल हुए. यह फिल्म श्रीलंका के गृहयुद्ध की घटनाओं पर आधारित है. मंच पर बोलते हुए उन्होंने प्रोपेगेंडा फिल्मों की कड़ी आलोचना की. अब सोशल मीडिया पर कई लोगों को लगा कि वह आदित्य धर और रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' की आलोचना कर रहे हैं.
उन्होंने इस बात पर भी चुटकी लेते हुए कमेंट किया कि फिल्म को CBFC से बिना किसी 'रिविजिंग कमिटी' के पास जाए ही सर्टिफिकेट मिल गया.
वेत्रिमारन ने क्या कहा?
'नीलीरा' के ट्रेलर लॉन्च पर वेत्रिमारन ने कहा, 'जब तक हम अपनी कहानियां खुद नहीं सुनाएंगे, हमारी जिंदगी वैसी ही मानी जाएगी जैसी हमारे दुश्मन बताते हैं. हमारे पास अपनी कहानियां सुनाने की आजादी (लोकतंत्र) नहीं है.' उन्होंने इस कहानी को बताने का फैसला करने के लिए फिल्म की टीम की तारीफ भी की. उन्होंने राणा दग्गुबाती की भी तारीफ की कि तेलुगू राज्यों से होने के बावजूद उन्होंने इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया.
डायरेक्टर ने कहा, 'यह फिल्म नफरत की बात नहीं करती. यह फिल्म हिंसा को बढ़ावा नहीं देती. यह कोई प्रोपेगेंडा फिल्म नहीं है; यह एक विचारधारा को बनाए रखने के लिए है.' उन्होंने आगे कहा, 'कई ऐसी फिल्में हैं जिन पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, और वे हिंसा या नफरत के जरिए करोड़ों कमाने की चाह रखती हैं. यह फिल्म नफरत बेचना नहीं चाहती, न ही किसी जाति, समुदाय या धार्मिक संप्रदाय का मजाक उड़ाना चाहती है.'
फिल्म की टीम से मजाकिया अंदाज में यह पूछने के बाद कि क्या इसे बिना 'रिविजिंग कमिटी' के पास जाए ही सर्टिफिकेट मिल गया, और उन्हें हां में जवाब मिलने के बाद वेत्रिमारन ने कहा, 'आजकल सब कुछ प्रोपेगेंडा बनता जा रहा है, और प्रोपेगेंडा में हमारी यादों को प्रभावित करने की ताकत होती है.'
'हमारी यादें बहुत कमजोर होती हैं, क्योंकि हम सब जानते हैं कि नोटबंदी से सबसे ज्यादा किसे तकलीफ हुई थी और जब लोग लाइनों में खड़े थे तो कितने लोगों की जान गई थी. लेकिन हम आसानी से उसके असर को बदल सकते हैं. तो, हम नफरत फैलाने वाले प्रोपेगेंडा के खिलाफ क्या कर सकते हैं? हमें ऐसी फिल्में बनाते रहना होगा और उन यादों को जिंदा रखना होगा.'
जानकारी के लिए बता दें कि विजय की फिल्म 'जना नायकन' को अभी तक CBFC से सर्टिफिकेट नहीं मिला है, क्योंकि उसे 'रिविजिंग कमिटी' के पास भेज दिया गया है. इसे जनवरी में रिलीज़ होना था.
वेत्रिमारन ने की 'धुरंधर' की आलोचना?
सोशल मीडिया पर इस बात की बहस छिड़ गई क्या वेत्रिमारन ने धुरंधर का नाम लिए बिना उसे प्रोपेगेंडा फिल्म कह दिया? क्योंकि उन्होंने नोटबंदी का उदाहरण दिया, जो धुरंधर फिल्म में दिखाया गया है.
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