'औरतें खुद को सामान की तरह पेश कर रहीं', बोलीं शबाना आजमी, आइटम सॉन्ग्स पर जताई नाराजगी

शबाना आजमी ने फिल्मों में 'आइटम नंबर्स' को शामिल किए जाने पर कड़ा रिएक्शन दिया और कहा कि इनमें महिला अपना सारा नियंत्रण खो देती है और पुरुष की नजर के सामने खुद को समर्पित कर देती है.

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आइटम सॉन्ग्स पर भड़कीं शबाना आजमी (Photo: YT/Sony Music India/ITG) आइटम सॉन्ग्स पर भड़कीं शबाना आजमी (Photo: YT/Sony Music India/ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST

दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी ने बॉलीवुड में आइटम गानों के बढ़ते चलन पर अपने विचार शेयर किए हैं. उनका कहना है कि इन गानों में जिस तरह से महिलाओं को दिखाया जाता है और जिस तरह से अश्लील बोल आम संस्कृति का हिस्सा बन गए हैं, उसे देखकर उन्हें अक्सर असहज महसूस होता है.

हाल ही में मुंबई में आयोजित 'We The Women' कार्यक्रम के दौरान एक्ट्रेस ने बताया कि ऐसे गानों का लोग खूब आनंद लेते हैं, लेकिन इनके गहरे अर्थों पर शायद ही कभी चर्चा होती है.

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शबाना आजमी ने क्या कहा?
1993 की फिल्म 'खलनायक' के मशहूर गाने 'चोली के पीछे क्या है' का जिक्र करते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि यह गाना आज भी बड़े पैमाने पर गाया जाता है, यहां तक कि बच्चे भी इसे गाते हैं. उन्होंने कहा कि यही बात उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करती है, क्योंकि कई युवा इन गानों के बोल तो दोहराते हैं, लेकिन उनके असली मतलब को पूरी तरह से नहीं समझते.

एक्ट्रेस ने इस बात पर भी जोर दिया कि आइटम गाने अक्सर पुरुषों की नजर पर बहुत ज्यादा निर्भर होते हैं. उन्होंने कहा कि आइटम गानों में कैमरे का फोकस जिस तरह शरीर के हिस्सों पर रहता है, वह महिला को एक 'ऑब्जेक्ट' में बदल देता है. इसी से यह तय होता है कि डायरेक्टर का इरादा क्या है. इससे लगता है कि एक आइटम नंबर में औरत अपना सारा कंट्रोल खो देती है और खुद को 'पुरुष की नजर' के हवाले कर देती है.'

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उन्होंने समझाया कि इस तरह के चित्रण महिलाओं के किरदारों से उनकी अपनी पहचान छीन सकते हैं और उन्हें कहानी के भीतर केवल सजावटी चीजों तक सीमित कर सकते हैं.

इसके बारे में सोचना चाहिए
शबाना आजमी ने स्वीकार किया कि भारत की आम संस्कृति को गढ़ने में बॉलीवुड संगीत ने एक बड़ी भूमिका निभाई है. यही वजह है कि उनका मानना ​​है कि फिल्म इंडस्ट्री को अपने कंटेंट के जरिए दिए जाने वाले मैसेज के प्रति हमेशा सचेत रहना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि फिल्म मेकर्स और ऑडियंस दोनों को ही ऐसे गानों के प्रभाव के बारे में और भी ज्यादा गंभीरता से सोचना चाहिए.

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