कोटा में राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामले में मंगलवार को कंज्यूमर कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. एक्टर सलमान खान की ओर से उनके वकील ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग, नई दिल्ली और राजस्थान हाईकोर्ट में जयपुर के आदेश पेश किए. इन दस्तावेजों पर परिवादी पक्ष ने आपत्ति जताई, जिसके बाद कोर्ट ने मामले को एविडेंस के तौर पर दर्ज करते हुए अगली सुनवाई 11 मई तय कर दी.
सुनवाई के दौरान सलमान खान की तरफ से एडवोकेट शुभम शर्मा और राजश्री पान मसाला की ओर से एडवोकेट राकेश सुवालका पेश हुए, जबकि परिवादी भाजपा नेता इंद्रमोहन सिंह हनी और उनके वकील रिपुदमन सिंह ने अदालत में पक्ष रखा. विपक्षी वकीलों ने साक्ष्य पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाते हुए उन्हें अंतिम मौका दिया. अब 11 मई के बाद इस मामले में अंतिम बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.
राजश्री पान मसाला के वकील ने बताया कि सलमान खान के खिलाफ जारी जमानती वारंट पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग पहले ही रोक लगा चुका है. वहीं दस्तावेजों की एफएसएल जांच से जुड़े विवाद में राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा राहत नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था, जहां से भी स्टे मिल चुका है.
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला उस वक्त शुरू हुआ जब परिवादी इंद्रमोहन सिंह हनी ने 26 दिसंबर को अदालत में दायर वकालतनामा और जवाब पर सलमान खान के हस्ताक्षरों की सत्यता पर सवाल उठाए. उन्होंने हस्ताक्षरों की एफएसएल जांच की मांग की. इस पर संज्ञान लेते हुए जिला उपभोक्ता अदालत ने आदेश दिया था कि हस्ताक्षरों की जांच कराई जाए और सलमान खान स्वयं उपस्थित होकर हस्ताक्षरित शपथ पत्र पेश करें.
हालांकि, इस आदेश के खिलाफ सलमान खान ने राज्य उपभोक्ता आयोग, जयपुर में अपील की, जहां शुरुआत में रोक लग गई थी. लेकिन बाद में आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह रोक हटा दी और कोटा कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. अब इस पूरे मामले की दिशा 11 मई की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां से केस निर्णायक मोड़ ले सकता है.
चेतन गुर्जर