34 साल मेहनत करने के बाद रवि किशन को मिली सफलता, छलका दर्द, बोले- मैं खत्म हो गया हूं...

लापता लेडीज़ और मामला लीगल है से चर्चा में आए रवि किशन ने 34 साल तक संघर्ष किया तब जाकर उन्हें ये मुकाम हासिल हुआ. वो बताते हैं कि तेरे नाम के बाद के मुश्किल दौर से निकलना उनके लिए आसान नहीं था. देर से मिली सफलता पर उन्होंने खुलकर बात की.

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देर से मिली सफलता से खुश हैं रवि किशन (File Photo: ITG) देर से मिली सफलता से खुश हैं रवि किशन (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:31 PM IST

रवि किशन इन दिनों अपने करियर के एक बेहतरीन दौर से गुजर रहे हैं. फिल्म ‘लापता लेडीज’ और वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’ में शानदार काम के बाद उन्हें खूब सराहना मिली है. इन दिनों वो फिल्म ‘भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन’ में नजर आ रहे हैं. इस फिल्म को बिनैफर और संजय कोहली ने बनाया है.

एकतरफा प्यार में रवि का किरदार...

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रवि ने अपनी इस देर से मिली सफलता पर बेहद खुश हैं. उन्होंने इसे जाहिर किया और बताया कि एक वक्त था जब वो थक चुके थे. तेरे नाम फिल्म के बाद उन्हें काम तक नहीं मिल रहा था.
 
ईटाइम्स से भाबीजी घर पर हैं फिल्म को लेकर रवि किशन कहते हैं- मैं हमेशा से इस शो का फैन रहा हूं. इसकी कहानी, डायरेक्टर और मेरा किरदार—तीनों वजहों से मैंने हां कहा. मुझे बिना ज्यादा एक्सप्रेशन दिए लोगों को हंसाना अच्छा लगता है. मेरा किरदार ऐसा है, जो दिल से प्यार करता है, लेकिन एकतरफा. ये बात मुझे बहुत पसंद आई. बिहार और उत्तर प्रदेश में मैं ऐसे लोगों से रोज मिलता हूं.

हालांकि रवि किशन पिछले कई दशकों से हिंदी फिल्मों में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बड़ी पहचान हाल ही में ही मिली है. इस बदलाव पर बात करते हुए वो कहते हैं- मैंने 34 साल तक धैर्य से इंतजार किया. एक वक्त ऐसा आया जब लोगों को लगने लगा कि मैं सिर्फ भोजपुरी फिल्मों तक सीमित हो गया हूं, राजनीति में चला गया हूं, उम्र हो गई है और अब धीरे-धीरे गायब हो जाऊंगा. लेकिन भगवान की कृपा से, जब लोग सोचते हैं कि सब खत्म हो गया, तभी किरण राव जैसी निर्देशक ‘लापता लेडीज’ जैसी स्क्रिप्ट लेकर आती हैं, फिर ‘मामला लीगल है’ आती है.

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'पिछले साल ने दिखा दिया कि जब फिल्ममेकर मुझ पर भरोसा करते हैं और अच्छा कंटेंट देते हैं, तो मैं क्या कर सकता हूं. मेरी जर्नी स्ट्रगल करने वालों के लिए एक मिसाल है.'

जब खाली बैठे रवि...

बॉलीवुड में काम के मौके कम मिलने वाले दौर को याद करते हुए वे कहते हैं- सलमान खान के साथ ‘तेरे नाम’ के बाद मैं काफी थक गया था, क्योंकि काम के मौके नहीं मिल रहे थे. मुझे लगा यहां बहुत भीड़ है, मैं इस रेस का हिस्सा नहीं बन पाऊंगा और कोई रिस्पॉन्स नहीं देगा. गुस्सा और निराशा तो थी, लेकिन मैंने उसी गुस्से को भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने में लगाया. मैंने कभी बॉलीवुड को दोष नहीं दिया. हिंदी सिनेमा ने ही मुझे पहचान दी और वही सब सिखाया, जिसे बाद में मुझे भोजपुरी फिल्मों ने अपनाया.

अपनी देर से मिली सफलता पर रवि किशन कहते हैं- ये उगते सूरज का खेल है, और ये बात हर प्रोफेशन में सच है. लेकिन अब जो प्यार मिल रहा है, उसके लिए मैं दिल से आभारी हूं.

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