दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार, 2 अप्रैल को बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में बकाया राशि चुकाने के लिए और समय देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने उनकी बार-बार देरी और असंगत दलीलों की तीखी आलोचना की. साथ ही मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
राजपाल को पड़ी फटकार
बार एंड बेंच से मिली जानकारी के मुताबिक, जस्टिस स्वराना कांता शर्मा ने यादव की 6 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि चुकाने के लिए 30 दिन का समय मांगने वाली अर्जी ठुकरा दी. उन्होंने साफ कहा, 'ना का मतलब ना है. मैं फैसला सुरक्षित रख रही हूं. मैं और समय नहीं दूंगी.' सुनवाई के दौरान यादव और उनके वकील द्वारा भुगतान के मुद्दे पर ली गई विरोधाभासी स्थितियों पर कोर्ट ने नाराजगी जताई. कोर्ट ने टिप्पणी की, 'अगर जज आपके साथ अच्छा व्यवहार कर रहा है तो कभी यह मत सोचिए कि जज कमजोर है.'
असंगति पर प्रकाश डालते हुए जज ने कहा, 'आप कह रहे हैं कि आप भुगतान करने को तैयार हैं, लेकिन आपके वकील कह रहे हैं कि चूंकि आप जेल जा चुके हैं, इसलिए आप भुगतान नहीं करेंगे. अगर आप भुगतान करने को तैयार हैं, तो फिर मैं यह मामला क्यों सुन रही हूं? भुगतान कर दीजिए.'
मई 2024 में एक सेशंस कोर्ट ने चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को दोषी ठहराया था. साथ ही उन्हें छह महीने की सजा सुनाई थी. बाद में हाईकोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया था. एक्टर के वकील ने आश्वासन दिया था कि विवाद सुलझा लिया जाएगा. इसी के साथ मामले को दिल्ली हाईकोर्ट मीडिएशन सेंटर को भेज दिया गया था. हालांकि कोर्ट ने देखा किया कि बार-बार दिए गए आश्वासनों और स्थगनों के बावजूद यादव ने वह राशि जमा नहीं की जिसका उन्होंने वादा किया था, जिसमें 2.5 करोड़ रुपये की किस्तें भी शामिल थीं.
फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने नॉन-कंप्लायंस के लिए राजपाल यादव को सरेंडर करने का आदेश दिया था. उनकी और समय मांगने वाली याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने 5 फरवरी को सरेंडर कर दिया. बाद में उन्होंने शिकायतकर्ता के पास 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद अंतरिम रूप से सजा निलंबन प्राप्त कर लिया.
शिकायतकर्ता के वकील ने कही बड़ी बात
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने तर्क दिया कि यादव केवल सजा काट लेने भर से वित्तीय दायित्व से बच नहीं सकते. उन्होंने कहा कि सजा पूरी होने से दायित्व समाप्त नहीं हो जाता और एक्टर ने खुद 10 करोड़ रुपये न चुकाने की बात स्वीकार की है. सिक्का ने कहा कि बकाया न चुकाए जाने के कारण कार्यवाही शुरू की गई थी और अभी भी लगभग 7.75 करोड़ रुपये बकाया हैं. हालांकि ट्रायल कोर्ट से पहले लगभग 2 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था.
कोर्ट ने एक बारगी सेटलमेंट की संभावना तलाशी और संकेत दिया कि अगर छोटी अवधि में 6 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया जाए तो विवाद सुलझाया जा सकता है, जिसमें शिकायतकर्ता भी प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार दिखे. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए राजपाल यादव ने कहा कि वे भुगतान से संबंधित किसी भी निर्देश का पालन करेंगे. साथ ही उन्होंने वित्तीय नुकसान का दावा भी किया और बताया कि उन्होंने पांच फ्लैट बेच दिए हैं और उन्हें भारी नुकसान हुआ है. हालांकि जब उन्होंने राशि जुटाने के लिए 30 दिन का समय मांगा तो कोर्ट ने और समय देने से इनकार कर दिया. तत्काल कोई सेटलमेंट न होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
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