‘ओ रोमियो’ के खिलाफ नेगेटिव कैम्पेन का डर! बॉलीवुड में पहली बार रिव्यू और रेटिंग पर मेकर्स ने उठाया कड़ा कदम

बुक माय शो से ‘ओ रोमियो’ के रिव्यू और रेटिंग हटाना बॉलीवुड के लिए एक नया मोड़ है. साउथ के बाद अब हिंदी सिनेमा में भी ये ट्रेंड शुरू हो चुका है. क्या है रिव्यू बॉम्बिंग? जिसके खिलाफ मेकर्स कोर्ट जाने लगे हैं और इसे लेकर क्यों बहस छिड़ी है, चलिए बताते हैं.

Advertisement
'ओ रोमियो' के मेकर्स ने बॉलीवुड में पहली बार ऐसा कड़ा कदम उठाया है! (Photo: Instagram/@shahidkapoor) 'ओ रोमियो' के मेकर्स ने बॉलीवुड में पहली बार ऐसा कड़ा कदम उठाया है! (Photo: Instagram/@shahidkapoor)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फिल्म ‘ओ रोमियो’ शुक्रवार से ही थिएटर्स में जनता का दिल जीतने की कोशिश में लगी है. डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की इस वायलेंट लव स्टोरी को क्रिटिक्स से मिक्स रिव्यूज मिले, मगर फिल्म का वर्ड ऑफ माउथ पॉजिटिव बनता नजर आ रहा है. शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस पर स्लो स्टार्ट के बाद, शनिवार को फिल्म ने 50% से ज्यादा जंप लिया. मगर बॉक्स ऑफिस पर ‘ओ रोमियो’ की बढ़ती पकड़ के बीच मेकर्स का एक कदम बहुत चर्चा में है— टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म बुक माय शो से ‘ओ रोमियो’ के रिव्यूज और रेटिंग्स गायब हैं.

Advertisement

क्यों गायब हुए ‘ओ रोमियो’ के रिव्यू और रेटिंग?
अगर आप बुक माय शो पर ‘ओ रोमियो’ का टिकट बुक करने जाएंगे, तो पाएंगे कि वहां फिल्म की रेटिंग्स और रिव्यूज नहीं हैं. इसकी जगह एक लाइन लिखी गई है— कोर्ट के आदेशानुसार रेटिंग्स और रिव्यूज डिसेबल किए गए हैं. इस बारे में मेकर्स या प्लेटफॉर्म ने ज्यादा जानकारी नहीं शेयर की है. मगर मेकर्स की तरफ से ये ‘ओ रोमियो’ के खिलाफ ‘रिव्यू बॉम्बिंग’ के डर से उठाया गया कदम नजर आता है.

बॉलीवुड में ये अपने-आप में पहला मामला है जब किसी फिल्म के मेकर्स ने इस तरह का कदम उठाया है. मगर साउथ में ये कोई नई बात नहीं है. वहां ‘रिव्यू बॉम्बिंग’ और उसके खिलाफ उठाए गए कदम काफी समय से चर्चा का मुद्दा रहे हैं.

रिव्यू-बॉम्बिंग और तेलुगू इंडस्ट्री के पंगे
साउथ की फिल्म इंडस्ट्रीज, खासकर तेलुगू इंडस्ट्री में ‘रिव्यू बॉम्बिंग’ को लेकर काफी समय से बहस छिड़ी हुई है. ये माना जा रहा है कि कई बड़ी फिल्मों के खिलाफ अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर प्लान्ड डिजिटल अटैक्स हो रहे हैं. बॉट्स के जरिए फिल्मों को जमकर नेगेटिव रिव्यूज और रेटिंग्स दी जाती हैं, जिससे बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का बिजनेस फीका हो जाता है. इसके लिए फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए कोऑर्डिनेटेड नेगेटिविटी फैलाई जाती है. ‘रिव्यू बॉम्बिंग’ से ‘प्रोटेक्शन’ के बदले फिल्म आने से पहले या रिलीज के बाद मेकर्स से पैसे वसूले जाते हैं.

Advertisement

इसी साल तेलुगू सुपरस्टार चिरंजीवी की फिल्म ‘मना शंकरा वरा प्रसाद गारू’ के मेकर्स ने इस तरह की रिव्यू बॉम्बिंग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट ने टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स को फिल्म के रिव्यूज और रेटिंग्स ब्लॉक करने का आदेश दिया था. इस कोर्ट ऑर्डर को लेकर लोगों में एक चिंता ये थी कि इससे जनता की फिल्म पर अपनी राय रखने की आजादी पर बंदिश लगेगी. मगर कोर्ट का ये आदेश केवल टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए था. मीडिया या सोशल मीडिया के लिए नहीं.

एक लंबे समय से नेगेटिव रिव्यूज पा रहे और फ्लॉप फिल्में दे रहे सीनियर सुपरस्टार चिरंजीवी ने कोर्ट के आदेश के बाद ‘मना शंकरा वरा प्रसाद गारू’ से तगड़ा कमबैक किया. इसके बाद कई और फिल्मों के लिए मेकर्स ने टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स को ऐसे निर्देश देने के लिए कोर्ट को अप्रोच किया.

‘ओ रोमियो’ इस तरह का कदम उठाने वाली पहली बॉलीवुड फिल्म है. पिछले कुछ समय से इंडस्ट्री में ‘रिव्यू बॉम्बिंग’ की चर्चा छिड़ती रही है, मगर पहली बार किसी ने इसका कानूनी उपाय निकाला है. अब देखना है कि क्या और बॉलीवुड मेकर्स भी इस रास्ते पर चलते दिखेंगे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement