गुंजन सक्सेना ने किया पंजा लड़ाने वाले सीन के सही में होने से इनकार

"गुंजन सक्सेना द करगिल गर्ल" फिल्म में एयरफोर्स ऑफिसर से पंजा लड़ाने वाले दृश्य पर गुंजन सक्सेना ने हाईकोर्ट को कहा- "मेरे साथ एयरफोर्स में ऐसा नहीं हुआ.'' कोर्ट ने निर्माताओं और इंडियन एयरफोर्स को साथ बैठकर आपसी सहमति से हल निकालने का निर्देश दिया है.

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गुंजन सक्सेना और जाह्नवी कपूर गुंजन सक्सेना और जाह्नवी कपूर

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

गुंजन सक्सेना द करगिल गर्ल फिल्म को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल किए गए अपने जवाब में गुंजन सक्सेना ने कहा कि फिल्म में जो आर्मी ऑफिसर के साथ आर्म रेसलिंग वाला सीन दिखाया गया है, वैसा उनके साथ इंडियन एयरफोर्स में कभी नहीं हुआ. दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने गुंजन सक्सेना से पिछली सुनवाई में पूछा था कि क्या फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है क्या वो सही है? और क्या उसको दिखाने से पहले फिल्म निर्माताओ ने इसकी इजाजत उसने ली थी? इसके जवाब में गुंजन ने कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में कहा है कि फिल्म में कुछ सीन ऐसे है जो उनके साथ नहीं हुए. मसलन एयरफोर्स ऑफिसर द्वारा उनके साथ पंजा लड़ाने वाला दृश्य जो फिल्म में दिखाया गया है, वो एयरफोर्स में पायलट रहते हुए उनके साथ कभी नहीं हुआ.

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धर्मा प्रोडक्शन तले बनी फिल्म में दिखाया गया था ये

लेकिन धर्मा प्रोडक्शन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस फिल्म को अगर जज खुद देखना चाहे हो वो फिल्म देखकर खुद तय कर सकते है कि क्या फिल्म के माध्यम से इंडियन एयरफोर्स की छवि को खराब करने की कोशिश की गई है. फिल्म में सिर्फ ये दिखाया गया है कि महिलाओं को अक्सर वर्क प्लेस पर कई बार भेदभाव का शिकार होना पड़ता है.

हालांकि फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि इंडियन एयरफोर्स के साथ अपनी सेवा के दौरान उसके लिंग के आधार पर कोई भेदभाव का सामना नहीं किया. गुंजन ने हाईकोर्ट को दिए जावाब में कहा है कि है मुझे दृढ़ता से विश्वास है कि एक संस्था के रूप में इंडियन एयरफोर्स बहुत प्रगतिशील है और मैं हमेशा अवसरों के लिए आभारी रहूंगी. 

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एयरफोर्स और नेटफ्लिक्स को करना होगा खुद समाधान: कोर्ट

केंद्र की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कोर्ट को कहा कि फिल्म में गुंजन सक्सेना को एयरफोर्स की पहली महिला पायलट दिखाया गया है, जबकि वो थर्ड बेंच से थी. एयरफोर्स ऑफिसर से पंजा लड़ाने से जुड़ी बात से खुद गुंजन ने इंकार कर दिया है. फिल्म निर्माता अगर गुंजन की पारिवारिक कहानी दिखा रहे थे, तब तक एयरफोर्स को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर गुंजन की कहानी में एयरफोर्स या उसके अधिकारियों को विलेन बनाकर दिखाने की कोशिश हुई तो उसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है.

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कोर्ट ने कहा कि नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म को अब तक लाखों लोग देख चुके है. ऐसे में अब इस फिल्म को देखने के लिए लोग थियेटर नहीं जाएंगे. ऐसे में दोनों पक्षों को समाधान मिलकर निकालने की जरूरत है. कोर्ट ने एयर फोर्स की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन को कहा है कि फिल्म निर्माताओं के साथ बैठकर दोनों पक्ष आपसी सहमति से इसका कोई हल निकाले. फिलहाल इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी है.

एयरफोर्स ने लगाए थे ये इल्जाम

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इंडियन एयर फोर्स की तरफ से याचिका लगाई गई है कि धर्मा प्रोडक्शंस के द्वारा बनाई गई गुंजन सक्सेना द कारगिल गर्ल में इंडियन एयर फोर्स की छवि को खराब करने की कोशिश की गई है. धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म गुंजन सक्सेना द कारगिल गर्ल पर इंडियन एयरफोर्स में पायलट के तौर पर भर्ती हुई गुंजन सक्सेना की कहानी है, फिल्म में दिखाया गया है कि उसे वहां लिंग भेद का शिकार होना पड़ा था.

 

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