‘घूसखोर पंडत’ नाम पर विवाद, रजिस्ट्रेशन के बिना रखा टाइटल? मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म 'घूसखोर पंडत' के नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक फिल्म संस्था ने टाइटल के बिना इजाजत इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है और लीगल नोटिस भेजकर दावा किया है कि यह समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है.

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 फिल्म 'घूसखोर पंडत' में मनोज बाजपेयी (Photo: X/Netflix) फिल्म 'घूसखोर पंडत' में मनोज बाजपेयी (Photo: X/Netflix)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

फिल्ममेकर नीरज पांडे की अपकमिंग नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडत' अपनी रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़े में फंस गई है. जैसे ही मुंबई में एक भव्य इवेंट के दौरान फिल्म का टीजर लॉन्च किया गया, फिल्म के टाइटल को लेकर हंगामा शुरू हो गया.अब फिल्म संस्थाओं ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

फिल्म मेकर्स कंबाइन ने नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स को आधिकारिक नोटिस भेजकर फिल्म के नाम पर आपत्ति जताई है. संस्था का दावा है कि मेकर्स ने इंडस्ट्री के तय नियमों के अनुसार इस टाइटल के लिए कोई मंजूरी नहीं ली थी. इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के सदस्य होने के नाते नीरज पांडे के लिए टाइटल रजिस्टर कराना अनिवार्य था. नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि बिना अनुमति के इस टाइटल का इस्तेमाल जारी रहा, तो मेकर्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

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'पंडत' शब्द के इस्तेमाल पर क्यों है गुस्सा?
फिल्म का नाम 'घूसखोर पंडत' सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है, लेकिन गलत कारणों से. 'पंडित' शब्द आमतौर पर धार्मिक विद्वान या पुजारी के लिए इस्तेमाल होता है. इसे 'घूसखोर' (रिश्वतखोर) जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ने पर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. आलोचकों का कहना है कि यह एक पूरे समुदाय की छवि को धूमिल करने की कोशिश है. देखते ही देखते इस फिल्म के नाम ने एक धार्मिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है.

वकील ने भी भेजा नोटिस
विवाद यहीं नहीं थमा, मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने भी नेटफ्लिक्स और फिल्म के प्रोड्यूसर्स को एक अलग कानूनी नोटिस थमाया है. इस नोटिस में कहा गया है कि फिल्म का टाइटल पंडित समुदाय की गरिमा पर हमला है और यह मानहानिकारक है. वकील का तर्क है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समुदाय को अपमानित करने या समाज में नफरत फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. उन्होंने इसे असंवैधानिक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला कदम बताया है.

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NHRC ने भी नोटिस जारी किया
वहीं इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सूचना प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेज दिया है. जिसमें कहा गया कि  इस प्रकार के टाइटल और कार्यक्रम जाति और समुदाय को लक्षित कर आलोचना,उपहास से इतर समुदाय को लज्जित करते हैं और समाज में वैमनस्यता बढ़ाते हैं जो कि एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक हिंसा ही है जिससे पब्लिक ऑर्डर बिगाड़ने व मानव जीवन को अघात पहुंचने का खतरा प्रतीत होता है. इसलिए मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया गया है यह सिर्फ ब्राह्मण समाज का मामला नहीं बल्कि पूरे समाज के ऊपर उंगली उठायी गई.

फिल्म में मनोज बाजपेयी का किरदार
इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे मनोज बाजपेयी 'अजय दीक्षित' नाम के एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रोल में हैं. फिल्म में उनके व्यवहार और रिश्वत लेने की आदतों की वजह से उनका निकनेम 'पंडित' रखा गया है. यह पूरी कहानी एक ही रात के घटनाक्रम पर आधारित है. फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा और साकिब सलीम भी मुख्य किरदारों में नजर आने वाले हैं.

मेकर्स ने साध रखी चुप्पी
इतने बड़े विवाद और कानूनी नोटिसों के बावजूद, अभी तक नेटफ्लिक्स या नीरज पांडे की प्रोडक्शन टीम की तरफ से कोई आधिकारिक सफाई पेश नहीं की गई है. इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि विवाद बढ़ने पर फिल्म का नाम बदला भी जा सकता है.
 

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