Jeevan: जेब में 26 रुपये रखकर घर से भागा, बना नामचीन विलेन, मगर प्यार के बदले पड़ी चप्पल

हिंदी फिल्मों को पसंद करने वाले लोगों को जीवन तो याद ही होंगे. उन्होंने अपने किरदार को ऐसा जिया कि रियल लाइफ में भी लोग नफरत करने लगे. जानिए उनके बारे में...

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बॉलीवुड का खूंखार विलेन जीवन (Photo: ITGD) बॉलीवुड का खूंखार विलेन जीवन (Photo: ITGD)

शिखर नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ चेहरे ऐसे रहे हैं जिन्हें पर्दे पर देखते ही दर्शकों के मन में नफरत और डर का मिला-जुला अहसास होने लगता था. एक ऐसा ही नाम था 'जीवन'. अपनी तिरछी नजरों, चेहरे पर मौजूद काले मस्से और डायलॉग बोलने के अनोखे अंदाज से उन्होंने खलनायकी की एक नई परिभाषा लिखी.

जीवन कुमार का फिल्मी सफर किसी चमत्कार से कम नहीं था. महज 26 रुपये लेकर घर से भागने वाले एक लड़के ने कैसे बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन और 60 से ज्यादा फिल्मों में 'नारद मुनि' बनकर रिकॉर्ड बनाया, यह कहानी वाकई दिलचस्प है.

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संघर्षों में बीता बचपन और मुंबई का सफर
बॉलीवुड में 'जीवन' के नाम से मशहूर हुए ओंकार नाथ धर का जन्म 24 अक्टूबर 1915 को कश्मीर के एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था. किस्मत ने बचपन से ही उनका कड़ा इम्तिहान लिया; जन्म के वक्त ही मां का साथ छूट गया और जब वे सिर्फ तीन साल के थे, तो पिता का साया भी सिर से उठ गया. 23 भाई-बहनों के भरे-पूरे परिवार के बावजूद जीवन अपनी राह खुद चुनना चाहते थे. उन्हें फोटोग्राफी का शौक था, लेकिन मंजिल कहीं और थी. 18 साल की उम्र में वे जेब में मात्र 26 रुपये डालकर मुंबई भाग आए ताकि अपने सपनों को हकीकत में बदल सकें.

किस्मत ने ऐसे खोल दिए बॉलीवुड के दरवाजे
जीवन का फिल्मों में आना किसी फिल्मी सीन जैसा ही था. वे मुंबई में फोटोग्राफी की ट्रेनिंग ले रहे थे और इसी दौरान अपने दोस्त द्वारका दिवेचा (जो बाद में 'शोले' के सिनेमैटोग्राफर बने) के साथ एक स्टूडियो पहुंच गए. वहां फिल्म की रिहर्सल चल रही थी और एक एक्टर ऐन मौके पर गायब था. 

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डायरेक्टर मोहन सिन्हा की नजर जीवन पर पड़ी और उन्होंने उन्हें रिप्लेस करने को कहा. जीवन ने वहां शेर-ओ-शायरी के साथ ऐसी दमदार परफॉरमेंस दी कि पूरी टीम दंग रह गई. यहीं से उन्हें अपनी पहली फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' (1935) मिली और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. दिग्गज फिल्ममेकर विजय भट्ट ने ही ओंकार नाथ को जीवन नाम दिया था.

जीवन एक ऐसे विलेन थे, जो हीरो से मार खाने में बचते नहीं थे. उनका मानना था कि फिल्में तभी हिट होती है, जब हीरो, खलनायक को पीटता है. वह अपने बेटे और एक्टर किरण कुमार को भी ये सीख देते थे.

विलेन के रूप में पहचान और नारद मुनि का रिकॉर्ड
जीवन ने अपने करियर में पृथ्वीराज कपूर से लेकर दिलीप कुमार और देव आनंद, अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों के साथ काम किया. 'वक्त', 'जॉनी मेरा नाम', 'अमर अकबर एंथनी' और 'लावारिस' जैसी फिल्मों में उनके शातिर किरदारों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया.

लेकिन एक दिलचस्प रिकॉर्ड जो उनके नाम दर्ज है, वो है 'नारद मुनि' का किरदार. उन्होंने करीब 60 से ज्यादा पौराणिक फिल्मों में नारद की भूमिका निभाई, जो आज भी एक बेमिसाल रिकॉर्ड है. उनकी आवाज और एक्टिंग का जादू ऐसा था कि लोग आज भी उनके डायलॉग्स याद करते हैं.

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जब असल जिंदगी में खानी पड़ी चप्पल
जीवन अपनी अदाकारी में इस कदर डूब जाते थे कि लोग उन्हें हकीकत में भी बुरा इंसान समझने लगे थे. उनकी खलनायकी का असर कुछ ऐसा था कि एक बार जब वे किसी इवेंट के लिए शहर से बाहर गए, तो स्टेशन पर उनका स्वागत फूलों से नहीं बल्कि नफरत से हुआ.

ट्रेन से उतरते ही एक महिला ने उन पर चप्पल फेंक दी और उन्हें बुरा-भला कहने लगी. हालांकि पुलिस ने दखल दिया, लेकिन यह घटना इस बात का सबूत थी कि जीवन ने पर्दे पर विलेन के रोल को कितनी शिद्दत से जिया था कि लोग उनके किरदार और असलियत के बीच का फर्क भूल गए थे.

जीवन की पत्नी का नाम किरण धर था. वो पाकिस्तान के लाहौर से थीं.  जीवन ने अपने घर का नाम भी 'जीवन किरण' रखा था.  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जीवन को लंग इंफेक्शन हो गया था, जिससे वो ऊबर नहीं सके. 10 जून 1987 को मुंबई में जीवन का निधन हो गया था.

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