PAK के खिलाफ दागे गोल, फुटबॉलर बनना चाहता था अर्चना का बेटा, दो फ्रैक्चर ने तोड़ा सपना

अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी के बेटे आर्यमन सेठी ने अपने व्लॉग में फुटबॉल करियर टूटने की दर्दभरी कहानी बताई. डिप्रेशन, बुलिंग और पैर में दो गंभीर फ्रैक्चर की वजह से उनका प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का सपना अधूरा रह गया, जबकि वो कभी महाराष्ट्र अंडर-13 के तेज खिलाड़ियों में शामिल थे और पाकिस्तान के खिलाफ चार गोल भी कर चुके थे.

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आर्यमन सेठी का टूटा सपना (Photo: Screengrab) आर्यमन सेठी का टूटा सपना (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:53 PM IST

मशहूर एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमन सेठी को शुरुआत में फुटबॉल खेलने का बहुत शौक था, वो इसी में अपना करियर बनाना चाहते थे. वो इंग्लैंड की फेमस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में एडमिशन भी ले चुके थे. लेकिन फिर एक हादस ने उनकी जिंदगी बदल दी. अपना दर्द बयां करते हुए आर्यमन ने बताया कि बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी थी, लेकिन चोटिल शरीर ने उनका साथ नहीं दिया. 

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अपने नए व्लॉग में आर्यमन ने बताया कि वो डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ चुके हैं. उन्होंने ये भी बताया कि उनके पैर में लगी दो गंभीर फ्रैक्चर की चोटों ने उनका प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का सपना तोड़ दिया. जबकि एक समय वो महाराष्ट्र के अंडर-13 में दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी थे और पाकिस्तान के खिलाफ मैच में चार गोल भी किए थे.

खिलाड़ियों ने आर्यमन को किया बुली 

आर्यमन ने कहा कि- स्पोर्ट्स का माहौल बहुत कॉम्पिटिटिव होता है. मेरी भावनाएं भी काफी तेज हैं, इसलिए मैं बहुत ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो गया था. मैं सबसे अच्छा बनना चाहता था और यही चीज मुझे आगे बढ़ाती थी.

सीनियर खिलाड़ी मुझे काफी बुली करते थे. फिर मैं भी दूसरों को बुली करने लगा. पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि मैं ऐसे माहौल में बड़ा हुआ जहां बहुत ज्यादा एग्रेशन था, इसलिए मेरे लिए शांत रहना मुश्किल हो गया था.

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'सेलिब्रिटी का बेटा' टैग ने दिया अकेलापन

आर्यमन ने बताया कि मशहूर पेरेंट्स- अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी का बेटा होने की वजह से भी उनका बचपन थोड़ा अकेला रहा. वो बोले- लोग मुझे हमेशा अलग नजर से देखते थे, जैसे ‘ये तो किसी सेलिब्रिटी का बेटा है.’ उनके लिए मैं बस ‘अमीर लड़का’ था. इसलिए लोग मुझसे दूरी बनाकर रखते थे.

'वो मुझे टीम से बाहर कर देते, मेरी चीजें चुरा लेते थे और मुझे समझ ही नहीं आता था कि क्या हो रहा है. लेकिन जब मैं अपने उम्र के बच्चों के साथ खेलता था तो सब ठीक रहता था, हालांकि कभी-कभी मैं खुद भी बुली बन जाता था. अब लगता है कि वो सब बेकार था और मुझे बुरा लगता है.' आर्यमन ने बताया कि उन्हें इससे बाहर आने के लिए थेरेपी  

उन्होंने यह भी बताया कि इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान उन्हें बुलिंग और नस्लभेद का भी सामना करना पड़ा था.

पाकिस्तान के खिलाफ दागे चार गोल

इसी व्लॉग में अर्चना ने भी अपने बेटे के करियर का सबसे गर्व वाला पल भी याद किया. उन्होंने कहा- तुम ईरान में इंडिया के लिए खेलने गए थे. पाकिस्तान के खिलाफ मैच में तुमने चार गोल किए थे. कोच ने मुझे फोन करके बताया- ‘मैडम, आपके बेटे ने पाकिस्तान के खिलाफ चार गोल किए हैं.’ मैं ये सुनकर बहुत खुश हो गई थी,''

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आर्यमन ने बताया कि उन्होंने छह मैचों में नौ गोल किए थे. इसके बाद उनकी मां ने उनका सपना पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की. उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उन्हें इंग्लैंड के क्लब Queens Park Rangers में ट्रायल दिलवाया. लेकिन इसके बाद उनकी जिंदगी में बड़ा झटका आया.

आर्यमन ने बताया- लंदन में पढ़ाई के दौरान मेरा पैर टूट गया. पहले हेयरलाइन फ्रैक्चर हुआ. फिर जब मैं भारत लौटकर महाराष्ट्र के लिए खेल रहा था, तो मैच के दौरान मेरा पैर बुरी तरह टूट गया. मैं उठ भी नहीं पा रहा था और रो रहा था क्योंकि मुझे लग रहा था कि मेरा फुटबॉलर बनने का सपना खत्म हो गया. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से इंग्लैंड लौटकर कोशिश की, लेकिन फिर शरीर ने साथ नहीं दिया. जितनी बार खेलने की कोशिश करता, पैर से खून निकलने लगता था. पैर में रॉड की वजह से पहले जैसा नहीं खेल पा रहा था. 

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