प्लेबैक सिंगर अनुराधा पौड़वाल की बेटी कविता पौड़वाल भी मां की तरह भजन गाने के लिए जानी जाती हैं. लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बॉलीवुड फिल्मों के गानों से की थी. कविता ने काजोल की फिल्म सपने में स्ट्रॉबेरी आंखें के अलावा तू संग छोड़ के जाना ना मेरा, ऐसे ना बदनाम करना मेरे प्यार को- जैसे कई फिल्मी गाने गाए.
कविता ने शुरू किया कीर्तन क्लब
कविता खुद बताती हैं कि उन्हें अनुराधा पौड़वाल की बेटी होने का फायदा मिल सकता था, लेकिन उन्होंने खुद शोबिज को अलविदा कहने का मन बनाया. वो न्यूयॉर्क जाकर बस गईं. कविता अब विदेश में जागरण, माता की चौकी ऑर्गनाइज करती हैं. उन्होंने खुद का कीर्तन क्लब भी शुरू किया है. इन इवेंट्स में खुद गाना गाती हैं. दो-तीन घंटे वो सिर्फ उस भक्ति और संगीत में लीन होती हैं.
कविता बताती हैं कि वो बचपन से ही वो भजन और भगवान के गाने सुनते हुए बड़ी हई हैं. उनके घर में नवरात्र का त्यौहार आज भी धूमधाम से मनाया जाता है. ये उनके खानदान की 150 साल पुरानी परंपरा है, जो आज भी जारी है. भले ही वो विदेश में क्यों न रहें.
कविता ने कहा कि कीर्तन क्लब शुरू करने के पीछे की मंशा ही यही थी कि जागरण की एनर्जी अनमैच्ड होती हैं. विदेश में इन चीजों को बहुत चलन है, लोग रेव पार्टी में जाते हैं, सब अलग-थलग हो जाते हैं, लेकिन यहां कीर्तन भी है और क्लब भी है. आप मम्मी-पापा, दादा-दादी, बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड किसी के भी साथ आओ. ढोल की बीट पर नाचो.
अनुराधा के करियर का पड़ा कविता पर असर
कविता ने साथ ही मां अनुराधा पौड़वाल के करियर पर भी बात की. वो बताती हैं कि उन्होंने बॉलीवुड को अपने करियर के पीक पर छोड़ा और भजन को चुना. मैं अपनी जर्नी को उनसे कम्पेयर नहीं करना चाहती. उन्होंने जो किया वो करना बहुत हिम्मत का काम है. मां के लिए ये बहुत प्रोफेशनल फैसला था. मैंने कभी नहीं पूछा. क्योंकि उनके ये लिए बहुत खास चीज नहीं थी.
'वो दुनिया के लिए स्टार्स थे, लेकिन घर में सब एक जैसे. वैसे भी शोबिज में पैर जमाने के लिए आपको एक सॉलिड फैमिली फाउंडेशन की जरूरत होती है. तो उन्होंने जो फैसला लिया वो उस वक्त के लिए सही था. '
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क