'बच्चों का जन्मदिन तक याद नहीं', अनिल कपूर ने पेरेंटिंग पर तोड़ी चुप्पी, बोले- कोई पछतावा नहीं

अनिल कपूर ने स्वीकार किया कि वे अपने बच्चों की जिंदगी से काफी हद तक गायब रहे, और बताया कि उन्हें तो उनके क्लास या जन्मदिन भी नहीं बता पता थे. हालांकि एक्टर ने कहा कि उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है.

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बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर (Photo: Hardik Chhabra/Arun Kumar) बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर (Photo: Hardik Chhabra/Arun Kumar)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:56 AM IST

पर्दे पर हमेशा अपनी उम्र को मात देने वाले और 'झक्कास' अंदाज में नजर आने वाले अनिल कपूर को दुनिया एक 'डैडी कूल' के रूप में देखती है. एक ऐसा स्टार जो न केवल अपनी फिटनेस बल्कि अपने बच्चों के साथ दोस्ती भरे रिश्ते के लिए भी जाना जाता है. लेकिन असल जिंदगी में पिता की इस भूमिका को लेकर अनिल कपूर के मन में कुछ अलग ही टीस है. 

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69 साल की उम्र में अनिल ने पहली बार स्वीकार किया है कि जब उनके बच्चे सोनम, रिया और हर्षवर्धन बड़े हो रहे थे, तब वह एक पिता के तौर पर उनके साथ मौजूद ही नहीं थे. लिली सिंह के पॉडकास्ट में उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी कमियों को स्वीकार किया और बताया कि कैसे उनके सुपरस्टारडम की कीमत उनके परिवार और बच्चों के बचपन को चुकानी पड़ी.

सुनीता एक सिंगल पेरेंट की तरह रही-अनिल
अपनी पेरेंटिंग पर खुलकर बात करते हुए अनिल कपूर ने कहा कि वह शायद ही कभी अपने बच्चों के साथ समय बिता पाए. उन्होंने स्वीकार किया कि उनके बच्चों की परवरिश का पूरा श्रेय उनकी पत्नी सुनीता को जाता है. अनिल के मुताबिक, 'सुनीता ने कई मायनों में एक सिंगल मदर की तरह बच्चों को संभाला है. मैं घर में मौजूद तो था, लेकिन एक पिता की जो जिम्मेदारी और मौजूदगी होनी चाहिए, वह मुझमें नहीं थी. आज अगर मेरे बच्चे मेरे बारे में कुछ अच्छा कहते हैं, तो मुझे खुशी होती है, लेकिन सच यह है कि मैं एक बेहतर पिता बन सकता था.'

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अनिल कपूर ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि वह अपने काम में इतने मशगूल थे कि उन्हें अपने बच्चों की बुनियादी बातों का भी अंदाजा नहीं रहता था. उन्होंने हंसते हुए लेकिन ईमानदारी से कहा, 'मुझे शायद ही कभी पता होता था कि मेरे बच्चे किस क्लास में पढ़ रहे हैं. हद तो तब हो जाती थी जब मैं उनके जन्मदिन तक भूल जाता था. सुनीता ही मुझे याद दिलाती थी कि आज बच्चों का बर्थडे है. जब बच्चे मुझसे अपनी बर्थ डेट पूछते थे, तो मैं पूरी तरह ब्लैंक हो जाता था.' 

बेटे को लेकर मन में टीस
इतनी कमियों के बावजूद अनिल कपूर कहते हैं कि उन्हें अपने अतीत को लेकर कोई पछतावा नहीं है. उनका मानना है कि वह अतीत में जीने वाले इंसान नहीं हैं और मजबूती से आगे बढ़ना पसंद करते हैं. उन्होंने बच्चों को लेकर कहा, 'वे अच्छा कर रहे हैं, खुश हैं, अपनी जिंदगी में सेटल हैं, और परिवार और करियर दोनों पर ही पूरा ध्यान दे रहे हैं.'

लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने एक बात जरूर मानी कि उन्हें अपनी बेटियों की तुलना में अपने बेटे हर्षवर्धन के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए था. अनिल ने कहा, 'बेटियां अक्सर अपनी मां के करीब होती हैं, लेकिन एक बेटे को बड़े होते समय अपने पिता के साथ की ज्यादा जरूरत होती है. मैं उस वक्त हर्ष के लिए वहां नहीं था.'

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जब अनिल से पूछा गया कि क्या उनकी गैर-मौजूदगी का उनके बेटे पर कोई असर पड़ा होगा, तो उन्होंने बड़े ही व्यावहारिक ढंग से जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'मैं आज भी सीख रहा हूं. हम दोनों दोस्तों की तरह हैं, लेकिन कभी-कभी मैं सोचता हूं कि क्या सिर्फ दोस्त बने रहना काफी था? मैंने कभी उन पर सख्ती नहीं दिखाई और शायद यह एक गलती थी.' उन्होंने अपनी बेटियों सोनम और रिया के आत्मविश्वास और उनके मजबूत संस्कारों का पूरा श्रेय पत्नी सुनीता को दिया और माना कि आज उनका परिवार जिस मुकाम पर है, वह सुनीता के त्याग और मेहनत का ही नतीजा है.
 

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