लाहौर 1947 को मिला नया टाइटल, बदला सनी देओल-आमिर खान की फिल्म का नाम!

आमिर खान और सनी देओल की पीरियड ड्रामा फिल्म लाहौर 1947 का नाम बदलकर बटवारा 1947 किया जा सकता है, जिसके मेकर्स 1947 के बंटवारे की दुखद घटना की बड़ी भावना को दिखाना चाहते हैं.

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लाहौर 1947 का बदला जाएगा नाम? (Photo: Screengrab) लाहौर 1947 का बदला जाएगा नाम? (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:16 AM IST

बॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर राजकुमार संतोषी के डायरेक्शन में बन रही सनी देओल और आमिर खान की मचअवेटेड पीरियड ड्रामा फिल्म 'लाहौर 1947' को लेकर पिछले काफी समय से चर्चा थी. अब फिल्म की रिलीज के करीब आते ही एक बड़ा अपडेट सामने आया है. खबर है कि फिल्म के मेकर्स इसके नाम में बदलाव करने जा रहे हैं.

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार इस फिल्म का टाइटल पहले कुछ और तय किया गया था, लेकिन अब इसे एक नए और अधिक प्रभावशाली नाम के साथ दर्शकों के सामने लाने की तैयारी है. यह फैसला फिल्म की गहराई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

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'लाहौर 1947' का बदला जाएगा नाम?
फिल्म इंडस्ट्री के ताजा गलियारों से खबर आ रही है कि आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस और राजकुमार संतोषी ने फिल्म का टाइटल बदलने का मन बना लिया है. जिस फिल्म को अब तक हम 'लाहौर 1947' के नाम से जानते थे, उसे अब 'बटवारा 1947' के नाम से रिलीज किया जा सकता है.

जर्नलिस्ट विक्की लालवानी के अनुसार, यह फैसला पिछले हफ्ते एक हाई-लेवल मीटिंग में लिया गया है. टीम का मानना है कि फिल्म की कहानी केवल लाहौर शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभाजन की उस पूरी त्रासदी और उस दौर की भावनाओं को समेटे हुए है.

इस फिल्म के साथ सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी सालों बाद पर्दे पर लौट रही है.  सनी देओल ने Zoom को दिए इंटरव्यू में बताया कि वे और संतोषी इस विषय पर पिछले कई वर्षों से चर्चा कर रहे थे. उन्होंने कहा, 'राजकुमार संतोषी और मैंने पहले भी कई गंभीर और इंटेंस फिल्में दी हैं. 'गदर' की सफलता के बाद जब आमिर खान इस प्रोजेक्ट के साथ मेरे पास आए, तो चीजें खुद-ब-खुद सही दिशा में बढ़ती चली गईं. इस फिल्म के किरदारों में जो गहराई और भावुकता है, वह दर्शकों के दिलों को छू लेगी.'

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लाहौर 1947 की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी मशहूर नाटककार असगर वजाहत के नाटक 'जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नी' पर आधारित है. यह विभाजन के समय की एक बेहद संवेदनशील दास्तां है. कहानी एक ऐसे मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जो लखनऊ छोड़कर लाहौर जाता है. वहां उन्हें एक ऐसी हवेली दी जाती है जिसे एक हिंदू परिवार छोड़कर जा चुका होता है. कहानी में मोड़ तब आता है जब उन्हें पता चलता है कि उस हिंदू परिवार का एक सदस्य अभी भी वहीं रह रहा है और अपनी जड़ें छोड़ने को तैयार नहीं है. यह फिल्म रिश्तों, इंसानियत और सरहदों के दर्द को बड़े पर्दे पर उकेरेगी.

लाहौर 1947 में सनी देओल और प्रीति जिंटा के साथ शबाना आजमी, अली फजल और करण देओल भी अहम रोल में हैं. खबर है कि यह फिल्म इसी साल रिलीज होगी.

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