गांधी परिवार का गढ़ रायबरेली, जहां 2022 के चुनाव में प्रियंका की होगी 'अग्निपरीक्षा'

Raebareli District Profile: आजादी के बाद कांग्रेस ने रायबरेली को अपना गढ़ या यूं कहें अपना चुनाव क्षेत्र बना लिया. हालांकि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुत बढ़िया प्रदर्शन नहीं कर पाती है. ऐसे में यूपी कांग्रेस की कमान संभाल रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा की असली अग्निपरीक्षा रायबरेली में ही होगी.

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raebareli district profile raebareli district profile

शैलेन्द्र प्रताप सिंह

  • रायबरेली,
  • 27 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:45 PM IST

यूं तो रायबरेली का आजादी से पहले का राजनीतिक इतिहास रहा है. किसान आंदोलन में जवाहर लाल नेहरू एक युवा नेता से परिपक्व नेता के तौर पर स्थापित हुए, तो आजादी के बाद कांग्रेस ने रायबरेली को अपना गढ़ या यूं कहें अपना चुनाव क्षेत्र बना लिया. राजनीतिक रूप से रायबरेली के बारे में शायर मुनव्वर राणा ने कुछ इस तरह से कहा है- 'रायबरेली है जनाब, यहां राजनीति पनारों से बहती है.'

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जहां हिंदी के महावीर प्रसाद द्विवेदी, मलिक मोहम्मद जायसी जैसे विद्वानों ने जन्म लिया तो मुनव्वर राना जैसे शायर भी इसी जिले से आते हैं. यह तो रही साहित्य की बातें. अब अगर खेलकूद की दुनिया में रायबरेली का जिक्र किया जाए तो यहां भी रायबरेली किसी से पीछे नहीं है. आरपी सिंह, अरविंद सिंह, रविकांत शुक्ला जैसे क्रिकेटर इस जिले ने दिए तो सुधा सिंह, दिवाकर शुक्ला जैसे एथलेटिक्स के बड़े खिलाड़ी भी इस जिले में पैदा हुए. 

राजनीतिक रूप से जिले के पहले सांसद फिरोज गांधी रहे तो उनके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा. आजादी के 70 सालों में महज तीन बार ऐसा हुआ जब इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस से इतर रहा हो. अभी यहां से सोनिया गांधी ही सांसद हैं. इस बार यूपी कांग्रेस की कमान संभाल रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा की असली अग्निपरीक्षा रायबरेली में ही होगी.

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सामाजिक-आर्थिक तानाबाना

यह शहर गांधी के गढ़ के रूप में विख्यात है, रायबरेली में कुल 19 लाख मतदाता हैं. जिले में 5 तहसीलें, 18 ब्लॉक, एक नगर पालिका, 5 नगर पंचायत और 56 वार्ड हैं. जिले में प्रमुख रूप से महाराजगंज, बछरावां, ऊंचाहार, लालगंज, सलोन जैसे कस्बे हैं, जो ग्रामीण अंचल को अपनी जरूरतों के लिए अपने पास बुलाने के लिए मजबूर करते हैं.

रायबरेली जिले में जनरल कास्ट की प्रमुख आबादी ब्राह्मण बाहुल्य है, जिसके बाद ठाकुर, वैश्य, पंजाबी और कायस्थ आते हैं जबकि ओबीसी में प्रमुख जातियां यादव, लोधी, राजपूत, कुर्मी, कश्यप, मौर्य, कुशवाहा, निषाद, नाई, बढ़ई, पाल, छतरी, प्रजापति, सुनार, रस्तोगी, जायसवाल, चौरसिया, हलवाई, कसौधन, साहू जैसी जातियां भी यहां रहती हैं, जबकि एससी में जाटव, पासी, सोनकर, कोरी, बाल्मीकि और धोबी की आबादी है.

2017 का जनादेश

विधानसभा के हिसाब से रायबरेली में 6 विधानसभा है, जिनमें दो आरक्षित विधानसभा और चार अनारक्षित विधानसभा सीट है. ऊंचाहार , सरेनी , सदर और हरचंदपुर अनारक्षित विधानसभाएं हैं, जबकि बछरावां और सलोन आरक्षित हैं. अलग-अलग विधानसभा में अलग-अलग नेताओं का हस्तक्षेप और रुतबा है.

कुछ नेता ऐसे भी हैं जिनका रायबरेली की हर विधानसभा में हस्तक्षेप रहा है. वर्तमान में विधानसभा की 6 सीटों में 3 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं जबकि 2 सीटों पर कांग्रेस पार्टी के विधायक और एक सीट पर समाजवादी पार्टी का विधायक है.

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सदर विधानसभा - इस सीट से बाहुबली विधायक स्व. अखिलेश सिंह की बेटी आदिती सिंह विधायक हैं. वह 2017 में कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं, लेकिन अब उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया है और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुकी हैं.

ऊंचाहार- इस सीट से समाजवाजी पार्टी के मनोज कुमार पांडे विधायक हैं. अखिलेश सरकार में मनोज कुमार पांडे मंत्री भी थे. वह जिले के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में से एक हैं.

सरेनी- इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के धीरेंद्र बहादुर सिंह विधायक हैं.  

हरचंदपुर- इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर राकेश सिंह जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.

बछरावां- इस सीट भारतीय जनता पार्टी के राम नरेश रावत विधायक हैं. 

सलोन- इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के दल बहादुर कोरी विधायक थे. कोरोना काल में उनका निधन हो गया था, तभी से यह सीट रिक्त है.

क्या रहेगा चुनावी मुद्दा?

इंडियन टेलिफोन इंडस्ट्री, एनटीपीसी से लेकर एम्स, रेल कोच, निफ्ट एफडीडीआई जैसे इंस्टीट्यूशंस और इंडस्ट्रीज जिले की शोभा बढ़ाते है. आने वाले विधानसभा चुनावों में शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, टूटी हुई सड़कें, सिंचाई के लिए पानी जैसी समस्याओं से राजनीतिक दल के प्रत्याशियों को खासी चुनौती का सामना करना पड़ेगा या यूं कहें चुनावी बयार में यह मुद्दे होंगे.

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