देश के पांच प्रदेशों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. तमिलनाडु में तमाम सियासी पार्टियां और उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने के लिए लोकलुभावनी घोषणाएं कर रहे है. मद्रास हाईकोर्ट ने इन लुभावने चुनावी वादों को लेकर सख्त टिप्पणी की है. एकतरफ हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों के नेताओं को फटकार लगाते हुए कहा है कि वे लोक लुभावने वादों की रेवड़ियां बांटना बंद करें, दूसरी तरफ मतदाताओं से भी सवाल किया कि क्या अपने वोट बेचने वाले लोगों को नेताओं पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार है?
मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन किरुवकरन और जस्टिस बी पुगलेंधी ने बुधवार को एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि उम्मीदवारों को फ्री लैपटॉप, टीवी, पंखे, मिक्सी और अन्य चीजों के बजाय बुनियादी सुविधाओं को मैनिफेस्टो में शामिल करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि बेहतर है कि राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी ऐसे मुफ्त सामान देने के वादे की जगह वोटरों को पानी, बिजली, स्वास्थ्य और ट्रांसपोर्ट सुविधाएं बेहतर करने के वादे करें. साथ ही कहा कि चुनाव जीतने पर उन वादों को पूरा भी करें.
हाईकोर्ट ने कहा कि हर दल लोकलुभावन वादों के मामले में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करता है. ऐसे में कोई एक दल परिवार की महिला मुखिया को 1000 रुपये महीने की आर्थिक सहायता का वादा करता है तो जवाब में दूसरा दल 1500 रुपये का प्रस्ताव रख देता है. कोर्ट ने कहा कि करदाता राज्य में मुफ्त वादों की बारिश में भीगने के इच्छुक नहीं हैं. परिणाम यह हुआ है कि लोगों में मुफ्त में जीवन यापन करने की मानसिकता पैदा होने लगी है
कोर्ट ने कहा कि परिणाम यह हुआ है कि लोगों में मुफ्त में जीवन यापन करने की मानसिकता पैदा होने लगी है. पीठ ने कहा, यह चलन बन गया है कि जो भी बैंक से कर्ज लेता है, उसे लौटाता नहीं है बल्कि चुनावों के दौरान कर्जमाफी की उम्मीद करने लगता है, इस तरह से लोग राजनीतिक दलों के जरिये भ्रष्टाचारी बनाए जा रहे है. हर उम्मीदवार चुनाव में करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं, क्योंकि बहुत सारे लोग कुछ हजार रुपये, बिरयानी और शराब के लिए अपना वोट बेचकर भ्रष्टाचारी बन रहे हैं.
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, यदि लुभावने वादों पर खर्च होने वाला पैसा सही तरीके से नौकरियों के मौके सृजित करने, बेहतर सुविधाओं वाले ढांचागत निर्माण करने और देश में 'अनाथ' जैसी हो गई कृषि को प्रोत्साहित करने में खर्च किया जाए तो सही मायने में सामाजिक उत्थान और राज्य की तरक्की होगी. हालांकि, देखना है कि कोर्ट के आदेश के बाद राजनीति में क्या बदलाव आता है.
दरअसल, तमिलनाडु में चुनाव को लेकर उम्मीदवार अपनी जीत पक्की करने के लिए एक से बढ़कर एक वादे कर रहे हैं. तमिलनाडु के दक्षिण मदुरै से लड़ने वाले उम्मीदवार, थुलम सरवनन ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कई लोक लुभावने वादे किए हैं. एक निर्दलीय उम्मीदवार ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि, अगर वो चुनाव जीतते हैं तो वो लोगों को हेलीकॉप्टर, रोबोट देंगे.
इसके साथ ही उन्होंने वादा किया है कि वो लोगों को आई-फोन देंगे और उनके खातों में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करेंगे.ऐसे ही एक दूसरे उम्मीदवार ने भी अपनी विधानसभा क्षेत्र में लोगों को तीन मंजिला मकान स्विमिंग पूल के साथ देंगे. यहीं नहीं नेता ने कहा है कि वो साउथ मदुरई में गर्मी से बचने के लिए 300 फीट लंबा हिमखंड बनाएंगे.
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