Exit Poll: भारी पड़ा दलितों का गुस्सा, विदर्भ में अंबेडकर ने छीना बीजेपी का हिस्सा

इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक विधानसभा चुनाव में विदर्भ इलाके में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की सीटें घटती नजर आ रही हैं. जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी और अन्य की सीटें बढ़ती दिख रही हैं. इससे लगता है कि विदर्भ इलाके में दलित मतदाताओं के गुस्से का बीजेपी-शिवसेना को शिकार होना पड़ा है.

प्रकाश अंबेडकर (फोटो-मानदर देवधर)
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

  • महाराष्ट्र के विदर्भ में BJP-शिवसेना को नुकसान
  • विदर्भ में 25 फीसदी दलित मतदाता किंगमेकर
  • कांग्रेस-एनसीपी और प्रकाश अंबेडकर को लाभ

बीजेपी-शिवसेना महाराष्ट्र की सियासी जंग फतह कर सत्ता में एक बार फिर वापसी करती नजर आ रही है, लेकिन विदर्भ इलाके में देवेंद्र फडणवीस का जादू नहीं चल सका है. इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक विधानसभा चुनाव में विदर्भ इलाके में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की सीटें घटती नजर आ रही हैं. जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी और अन्य की सीटें बढ़ती दिख रही हैं. इससे लगता है कि विदर्भ इलाके में दलित मतदाताओं के गुस्से का बीजेपी-शिवसेना को शिकार होना पड़ा है.

इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक इस बार के चुनाव में विदर्भ इलाके की कुल 62 विधानसभा सीटों में से बीजेपी-शिवसेना को 38 सीटें मिलती नजर आ रही हैं. जबकि, 2014 में बीजेपी ने 44 और शिवसेना ने 4 सीटें जीती थीं. इस तरह से दोनों पार्टियों ने मिलकर 48 सीटें जीती थीं. एग्जिट पोल अगर नतीजों में तब्दील होता है तो दोनों को करीब 10 सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इसी विदर्भ के इलाके की नागपुर से चुनकर आते हैं.

वहीं, दूसरी ओर एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन विदर्भ इलाके में 16 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि वंचित बहुजन अघाड़ी सहित अन्य के खाते में 8 सीटें जाती हुई नजर आ रही हैं. जबकि 2014 के विधानसभा चुनाव में विदर्भ इलाके में कांग्रेस को 10, एनसीपी को 1 और अन्य को 4 सीटें मिली थीं. इस तरह से कांग्रेस-एनसीपी के खाते में 5 से 6 और अन्य के लिए 4 सीटों की बढ़ोतरी होती नजर आ रही है.

विदर्भ में दलित मतदाता किंगमेकर

दरअसल, महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में 25 फीसदी के करीब दलित मतदाता हैं. कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर 35 फीसदी से भी ज्यादा दलित वोटर है. दलित नेता रामदास आठवले के रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया बीजेपी के साथ चले जाने के बाद दक्षिणपंथी विचारधारा से दूरी रखने वाला नवबौद्ध दलित समाज बेसहारा महसूस कर रहा था.

भीमा-कोरेगांव से प्रकाश अंबेडकर ने पकड़ बनाई

दो साल पहले हुई भीमा-कोरेगांव की घटना के बाद जब इस वर्ग के दलितों की कमान प्रकाश अंबेडकर ने थामी, तो इस वर्ग को नेतृत्व मिल गया. सालों से राजनीतिक वनवास झेल रहे प्रकाश अंबेडकर की उसके बाद से पौ बारह हो गई. इसी का नतीजा है कि लोकसभा चुनाव में प्रकाश अंबेडकर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाया.

लोकसभा में 14 फीसदी वोट मिले थे

लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन ने कांग्रेस-एनसीपी को करीब 12 लोकसभा सीटों पर खासा नुकसान पहुंचाया था. ओवैसी-अंबेडकर ने 14 फीसदी वोट हासिल करके कांग्रेस-एनसीपी को भारी नुकसान किया था. दलित समुदाय का महाराष्ट्र में तेजी से प्रकाश अंबेडकर की ओर झुकाव बढ़ा है.

इसका असर इस बार के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है. इसका फायदा भी प्रकाश अंबेडकर की पार्टी को मिलता दिख रहा है. विदर्भ इलाके में अन्य को जो 8 सीटें मिली हैं, इसमें अंबेडकर की पार्टी के हिस्से में कई सीटें आ सकती हैं. प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी ने महाराष्ट्र की 274 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे.

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