जातीय समीकरण के कारण नीतीश की JDU ने मोदी कैबिनेट से पीछे खींचे पांव

बिहार में बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले मोदी कैबिनेट में शामिल होने से पीछे हट गई. माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में जेडीयू से एक मंत्री बनाए जाने से नीतीश कुमार का जातीय समीकरण सेट नहीं हो पा रहा था, इसीलिए जेडीयू ने कदम पीछे खींच लिए.

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नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 31 मई 2019,
  • अपडेटेड 1:42 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सिपहसालारों के साथ गुरुवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल में बिहार से छह सांसदों को शामिल किया. नित्यानंद को छोड़कर बाकी सभी पुराने चेहरों को तवज्जो दी है. जबकि बिहार में बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले मोदी कैबिनेट में शामिल होने से पीछे हट गई. माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में जेडीयू से एक मंत्री बनाए जाने से नीतीश कुमार का जातीय समीकरण सेट नहीं हो पा रहा था, इसीलिए जेडीयू ने कदम पीछे खींच लिए.

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मोदी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले गुरुवार को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने साफ कहा कि वे बीजेपी के साथ हैं लेकिन मंत्रिमंडल में सांकेतिक रूप से शामिल होने के औपचारिक न्योते को स्वीकार करने के प्रस्ताव पर उनकी पार्टी के लोगों ने अपनी सहमति नहीं दी. इसलिए वो सरकार में शामिल नहीं होंगे. जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा था कि हम न तो असंतुष्ट हैं और न ही नाराज हैं, लेकिन हमारे पार्टी से कोई भी मंत्री नहीं बनेगा.

नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए के मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार जेडीयू के लिए दो मंत्री पद मांग रहे थे, इनमें एक कैबिनेट और एक स्वतंत्र प्रभार. सूत्रों की मानें तो इस बात पर दोनों के बीच शुरू में सहमति बन गई थी, लेकिन बाद में बीजेपी ने जेडीयू सहित सहयोगी दल को एक ही मंत्री पद देने पर मुहर लगाई. इस फॉर्मूले पर शिवसेना तैयार हो गई, लेकिन जेडीयू ने अपने जातीय समीकरण को देखकर कदम पीछे खींच लिया.

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दरअसल पहले नीतीश कुमार जेडीयू के महासचिव आरसीपी सिंह को कैबिनेट और ललन सिंह के लिए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चाहते थे. नीतीश कुमार मोदी के मंत्रिमंडल में जेडीयू के कोटे से एक कैबिनेट मंत्री के फॉर्मूले की बात मान लेते तो किसे वह मंत्री बनाए और किसे नहीं, इस पर पसोपेश की स्थिति में होते. ऐसे में अगर जेडीयू से आरसीपी सिंह को मंत्री बनाते तो  नीतीश कुमार के ऊपर आरोप लगता कि अपनी जाति, यानी कुर्मी से ही नेता को मंत्री बनाया है. इससे उनको बिहार में अगड़ी जाति के लोग नाराज होने का खतरा है.  

इसलिए नीतीश कुमार चाहते थे कि आरसीपी सिंह के साथ ललन सिंह को मंत्री बनाया जाए. ललन सिंह भूमिहार जाति से आते हैं. ऐसे में नीतीश उन्हें मंत्री बनवाकर बिहार में जातियों के संतुलन को बनाए रखना चाहते थे. ऐसे में बीजेपी के एक मंत्री के फॉर्मूले के पचड़े में पड़ने के बजाय नीतीश कुमार से मंत्रिमंडल से अपने आपको अलग कर लिया.  

दरअसल बिहार में 2020 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में केंद्र के बजाय वह अभी राज्य पर ज्यादा फोकस रखना चाहते हैं. बिहार के विधानसभा चुनाव से पहले वो किसी तरह के कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं. नीतीश न तो बीजेपी से अभी कोई रिश्ता खराब करना चाहते हैं और न ही बिहार में अपना जातीय समीकरण.

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