बिहार की कटिहार समेत देश की 97 लोकसभा सीटों पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को वोटिंग होगी. इस बार कुल 9 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. कुल 33 नामांकन दाखिल किए गए थे और 4 निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपना नाम वापस ले लिया था, जबकि बाकी के नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिए थे.
कटिहार लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी से तारिक अनवर, जनता दल (युनाइटेड) से दुलाल चंद्र गोस्वामी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी से मुहम्मद शाकुर, बहुजन समाज पार्टी से शिवनंदन मंडल, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) से अब्दुर रहमान, राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी से गंगा केबट और भारतीय बहुजन कांग्रेस से बसुकीनाथ चुनाव मैदान में हैं. इस बार बीजेपी यहां से चुनाव नहीं लड़ रही. यह सीट एनडीए में बीजेपी की सहयोगी जनता दल (युनाइटेड) के खाते में चली गई है.
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कटिहार सीट से एनसीपी के टिकट पर तारिक अनवर ने जीत दर्ज की थी. हालांकि अब उन्होंने कांग्रेस ज्वॉइन कर ली है. पिछले लोकसभा चुनाव में तारिक अनवर को 4 लाख 31 हजार 292 वोट मिले थे, जबकि उनके करीबी प्रतिद्वंदी बीजेपी के निखिल कुमार चौधरी को 3 लाख 16 हजार 552 वोट हासिल हुए थे.
इसके अलावा पिछले चुनाव में जेडीयू के राम प्रकाश महतो को 1 लाख 765 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि जेएमएम के बालेश्वर मरांडी को 33 हजार 593 वोटों से संतोष करना पड़ा था. इससे पहले साल 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के निखिल कुमार चौधरी ने तारिक अनवर को 14 हजार 15 वोटों से शिकस्त दी थी.
कटिहार लोकसभा सीट को तारिक अनवर का गढ़ माना जाता है. यहां से वो 5 बार सांसद चुने जा चुके हैं. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के निखिल कुमार चौधरी भी यहां से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. अगर पिछले चुनावों पर नजर दौड़ाई जाए, तो साल 1957 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के अवधेश कुमार सिंह को जीत मिली थी. साल 1958 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के बी. विश्वास के खाते में जीत गई. इस सीट से साल 1962 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की प्रिया गुप्ता, 1967 में कांग्रेस के टिकट से सीताराम केसरी और साल 1977 में जनता पार्टी के युवराज ने इस सीट से चुनाव जीता था.
कटिहार लोकसभा सीट से तारिक अनवर ने साल 1980, 1984, 1996 और 1998 और 2014 में यानी कुल 5 बार जीत दर्ज की. तारिक अनवर पहले कांग्रेस में थे और 25 मई 1999 को सोनिया गांधी के विदेशी मूल का विरोध करते हुए कांग्रेस छोड़ दी थी. इसके बाद शरद पवार और पी. संगमा के साथ मिलकर एनसीपी यानी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी बना ली थी.
कटिहार संसदीय क्षेत्र के तहत 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी और बरारी विधानसभा सीटें शामिल हैं. साल 2015 के विधानसभा चुनाव में 2 बीजेपी, 2 कांग्रेस, 1 आरजेडी और 1 सीट CPI(ML) (L) ने जीती थी. कटिहार संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 12 लाख 72 हजार 769 है, जिनमें से 6 लाख 75 हजार 944 पुरुष वोटर और 5 लाख 96 हजार 825 महिला वोटर हैं.
कटिहार लोकसभा सीट बिहार के कटिहार जिले में आती है. यह जिला पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है. पहले कटिहार जिला पूर्णिया जिले का एक हिस्सा था, लेकिन 1973 में अलग हो गया था. मुगल शासन के अधीन कटिहार जिले की स्थापना सरकार तेजपुर ने की थी. 13वीं शताब्दी के शुरुआत में यहां पर मोहम्मद्दीन शासकों ने राज किया.
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राम कृष्ण