हिमाचल चुनाव: साढ़े तीन दशक से सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड, 2022 में टूटेगी परंपरा या रहेगी बरकरार

हिमाचल प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है. सूबे में 12 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 8 दिसंबर को नतीजे आएंगे. चुनाव में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को इम्तिहान से गुजरना होगा.1985 से चले आ रहे हर पांच साल पर सत्ता परिवर्तन के ट्रेंड को क्या वो तोड़ पाएंगे या फिर कांग्रेस की होगी वापसी?

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जयराम ठाकुर और प्रतिभा सिंह जयराम ठाकुर और प्रतिभा सिंह

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 14 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 9:24 PM IST

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 का औपचारिक ऐलान हो गया है. प्रदेश में 12 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 8 दिसंबर को नतीजे आएंगे. हिमाचल प्रदेश में पिछले साढ़े तीन दशकों से हर पांच साल में सत्ता बदलने का ट्रेंड चला आ रहा है. बीजेपी सत्ता परिवर्तन के सिलसिले को तोड़ने की कवायद में जुटी है तो कांग्रेस सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं. ऐसे में देखना है कि इस बार ट्रेंड बरकरार रहता है या फिर टूट जाएगी परंपरा?

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1985 से बदलती रही है सत्ता
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में 1985 के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनाव में हर बार सत्ता परिवर्तन हुआ है. हिमाचल में पांच साल कांग्रेस तो पांच साल बीजेपी राज करती रही है. मौजूदा समय में बीजेपी सत्ता पर काबिज है, जिसके चलते कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है. उसे सत्ता में वापसी की आस दिख रही है, लेकिन बीजेपी इस इतिहास को बदलने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य हिमाचल है, जिसके चलते बीजेपी के लिए काफी अहम माना जा रहा है. 

हिमाचल में कांग्रेस का दबदबा
हिमाचल में लंबे समय कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन आपातकाल के बाद से सियासी हालत बदल गई है. हिमाचल प्रदेश में 1952 से लेकर 1977 तक कांग्रेस का राज रहा है. यशवंत सिंह परमार और रामलाल ठाकुर कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री बनते रहे. हिमाचल में नए युग की शुरुआत आपातकाल के बाद शुरू हुई. 1977 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल होना पड़ा और जनता पार्टी की अगुवाई में सरकार बनी. जनता पार्टी की सरकार में शांता कुमार मुख्यमंत्री बने और इस तरह पहली बार गैर-कांग्रेस सरकार बनी.  

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80 के दशक से बदल रही सत्ता
आपातकाल के बाद 1980 में कांग्रेस सत्ता में वापसी की और 1985 में दोबारा सत्ता में काबिज हुई, लेकिन इसके बाद से ही सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड शुरू हुआ. 1990 के विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी 46 सीटें जीतकर सत्ता में आई, लेकिन अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद 1992 में सरकार बर्खास्त कर दी गई. ऐसे में 1993 में विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही और वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री. पांच साल के बाद 1998 में विधानसभा चुनाव हुए बीजेपी ने कांग्रेस को मात देकर सत्ता में वापसी की और प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने. 

वीरभद्र बनाम धूमल के बीच रही सत्ता
हिमाचल में कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही नहीं बल्कि वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के इर्द-गिर्द भी सत्ता घूमती रही है. 2003 में विधानसभा चुनाव हुए, कांग्रेस ने बीजेपी को मात देकर फिर से सत्ता में वापसी की और वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने. इस चुनाव में कांग्रेस 43 सीटें जीती तो बीजेपी 16 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद साल 2007 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 41 और कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं. इस तरह बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब रही और प्रेम कुमार धूमल सीएम बने. 

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पांच साल के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 36 और बीजेपी को 26 सीटें मिली थी. कांग्रेस से वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने और पांच साल के बाद चुनाव हुए तो अपनी कुर्सी नहीं बचाकर रख पाए. 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी मात खानी पड़ी और बीजेपी सत्ता में वापसी करने में कामयाब रही. बीजेपी सत्ता में आई, लेकिन धूमल चुनाव हार गए.

जयराम ठाकुर की अग्निपरीक्षा

बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई तो जयराम ठाकुर के सिर सत्ता का ताज सजा. जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री की लंबी सूची में नया नाम जुड़कर आया है, लेकिन अब पांच साल के बाद उनके इम्तिहान की घड़ी है. हर पांच साल में सत्ता बदलने की परंपरा ने बीजेपी के लिए चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन बीजेपी ट्रेंड को तोड़ने के लिए हर संभव कोशिश में है. हिमाचल विधानसभा में इस बार 55 लाख मतदाता नई सरकार का फैसला करेंगे? 
 

 

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