ओखला में दिलचस्प हुई लड़ाई, अमानतुल्ला को टक्कर देंगे परवेज हाशमी

दिल्ली के ओखला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के परवेज हाशमी ने उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. हाशमी इस सीट से अभी तक चुनाव नहीं हारे हैं, जिसके चलते आम आदमी पार्टी के अमानतुल्ला खान के सियासी समीकरण गड़बड़ा गए हैं. वो चार बार इस सीट से जीतकर विधायक बन चुके हैं.

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Delhi Election 2020:अमानतउल्ला खान और परवेज हाशमी Delhi Election 2020:अमानतउल्ला खान और परवेज हाशमी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST

  • दिल्ली के ओखला विधानसभा सीट पर कड़ा मुकाबला
  • कांग्रेस ने परवेज हाशमी ने उतरकर AAP का बिगड़ा खेल

दिल्ली की मुस्लिम ओखला विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने आसिफ मोहम्मद खान की जगह पुराने और दिग्गज नेता परवेज हाशमी को प्रत्याशी बनाया है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक अमानतुल्ला खान पर एक बार फिर से दांव लगाया है तो बीजेपी ने ब्रह्म सिंह को टिकट दिया है. परवेज हाशमी के इस सीट से मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है और यहां एकतरफा नहीं बल्कि त्रिकोणीय लड़ाई मानी जा रही है.

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ओखला विधानसभा सीट पर चुनावी सरगर्मी कम सीएए-एनआरसी के विरोध की चर्चा ज्यादा है. जामिया और शाहीन बाग इलाके में पिछले 37 दिनों से सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं. इसका नतीजा है कि शाहीन बाग देश भर में सीएए विरोध का प्रोटेस्ट मॉडल बन चुका है, जिसकी तर्ज पर देश के कई शहरों में महिलाएं बच्चे और नौजवानों के आंदोलन शुरू हो गए हैं.

ओखला कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन 2015 में केजरीवाल की लहर में कांग्रेस को यहां से करारी हार का सामना करना पड़ा है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने अपने पुराने दुर्ग में एक बार फिर जीत दर्ज करने के लिए पुराने चेहरे परवेज हाशमी को मैदान में उतारा है.

परवेज हाशमी ओखला सीट से कभी भी चुनाव नहीं हारे हैं, चार बार जीतकर दर्ज कर यहां से विधायक बने. बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद ओखला में कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त विरोध था. इसके बावजूद परवेज हाशमी इस सीट से जीतने में कामयाब रहे थे. इससे ओखला इलाके में उनकी राजनीतिक पकड़ को समझा जा सकता है.

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ओखला के परवेज हाशमी के अलावा आसिफ मोहम्मद खान दो बार विधायक रहे हैं. आसिम खान तब ओखला से जीतने में कामयाब रहे थे, जब परवेज हाशमी ने राज्यसभा सदस्य चुने जाने बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद आसिफ 2013 में दोबारा से विधायक चुने गए, लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की लहर में अपनी सीट नहीं बचा सके. अमानतुल्ला खान ने आसिम खान को मात देकर 2015 में विधानसभा पहुंचे और केजरीवाल के करीबी नेता बने.

इस बार के चुनाव में अमानतुल्ला का मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता परवेज हाशमी से है. हाशमी की अपनी ओखला में एक टीम है और मुस्लिम मतों पर पकड़ होने के साथ-साथ हिंदुओं के बीच अच्छी खासी लोकप्रियता है. इसी का नतीजा था कि 2008 में बटला हाउस एनकाउंटर के बाद भी वह जीतने में वह कामयाब रहे थे.

हालांकि, अब समीकरण बदल गए हैं और दिल्ली में बीजेपी का ग्राफ बढ़ा है और ब्रह्म सिंह मैदान में उतरे हैं. ऐसे में मुस्लिम वोट में परवेज हाशमी और अमानतुल्ला के बीच बंटेगा तो हिंदू वोट में भी परवेज हाशमी सेंधमारी करेंगे. इस तरह से परवेज के मैदान में उतरने से ओखला का मुकाबला दिलचस्प बन गया है.

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