गरखा विधानसभा सीटः यहां है RJD का दबदबा, क्या हैट्रिक लगा पाएंगे BJP के मांझी?

गरखा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस सीट पर पिछले 5 चुनावों में दो बार बीजेपी और दो बार आरजेडी का कब्जा रहा है.

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Garkha assembly seat election 2020, RJD MLA Muneshwar Chaudhary Garkha assembly seat election 2020, RJD MLA Muneshwar Chaudhary

अजीत तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:59 AM IST

बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, तीन चरणों में हुए चुनावों में इस बार कुल 59.94 फीसदी वोटिंग हुई है. अब 10 नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की गरखा विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 57.47% मतदान हुआ. बिहार विधानसभा चुनाव गरखा से पिछली बार चौधरी ने बीजेपी उम्मीदवार ज्ञानचंद मांझी को करीब 40 हजार वोटों के अंतर से हराया था. हालांकि, इस दौरान उन्हें जेडीयू का समर्थन प्राप्त था जो अब बीजेपी के साथ है.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि
गरखा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस सीट पर पिछले 5 चुनावों में दो बार बीजेपी और दो बार आरजेडी का कब्जा रहा है. वहीं एक बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में रघुनंदन मांझी जीत का परचम लहराने में सफल रह चुके हैं. रघुनंदन मांझी ने फरवरी 2005 में हुए विधानसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी लेकिन इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और अक्टूबर 2005 में हुए चुनावों में उन्हें बीजेपी के उम्मीदवार ज्ञानचंद मांझी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. ज्ञानचंद मांझी यहां से लगातार दो बार जीते लेकिन 2015 के चुनाव में उन्हें भारी मतों के अंतर हार झेलनी पड़ी. कांग्रेस की बात करें तो इस सीट पर 1985 के बाद से यहां हाथ के निशान वाली पार्टी को जीत नसीब नहीं हुई है.

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सामाजिक ताना बाना
बताया जाता है कि गरखा विधानसभा सीट पर पिछड़े वर्ग के वोटर चुनाव में काफी बड़ा रोल निभाते रहे हैं. सारण जिले के तहत आने वाले इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 426639 आबादी रहती है. जिसमें पूरी की पूरी आबादी ग्रामीण है. यहां कुल आबादी में अनुसूचित जाति (एससी) के लोगों को अनुपात 13.69 फीसदी है. 

दूसरे चरण में 3 नवंबर 2020 को इस सीट पर वोट डाले जाएंगे. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

इस बार के उम्मीदवार

  • बीजेपी - ज्ञानचंद मांझी
  • आरजेडी - सुरेंद्र 

2015 का जनादेश
2019 के लोकसभा चुनावों में 57.28 फीसदी वोटिंग हुई थी, वहीं 2015 के विधानसभा चुनावों में यहां वोटिंग परसेंटेज 55.71 फीसदी रहा था. साल 2015 के चुनावों में आरजेडी विधायक मुनेश्वर चौधरी को 89249 वोट मिले थे वहीं, उनके विरोध में लड़ने वाले बीजेपी उम्मीदवार ज्ञानचंद मांझी को 49366 वोट मिले थे.

मौजूदा विधायक का रिपोर्ट कार्ड
1955 में गरखा के मीठेपुर में जन्में मुनेश्वर चौधरी ने जेपी आंदोलन के दौरान राजनीति में कदम रखा था. जेल गए और एक साल तक भूमिगत भी रहे. आंदोलन के दिनों में उन्हें पुलिस प्रताड़ना को भी झेलना पड़ा.

अपने 46 साल के राजनीतिक करियर में चौधरी 5 बार विधायक बने. वो बिहार सरकार में मंत्री भी रहे. खेती और बागवानी में उनकी विशेष रूचि है.

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