कोलकाता: विज्ञापन में महिला को मिला PM आवास, हकीकत में किराए के तंग मकान में रहती हैं लक्ष्मी

पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में जहां एक ओर बीजेपी जीत के दावे कर रही है, तो वहीं पीएम आवास योजना के तहत अखबारों में दिया गया एक विज्ञापन पार्टी के लिए शर्मिंदगी की वजह बन सकता है. इस विज्ञापन में जिस महिला को पीएम आवास योजना का लाभार्थी दिखाया गया है, वो खुद किराए के मकान में रहती है.

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अखबार के विज्ञापन में लक्ष्मी देवी की फोटो अखबार के विज्ञापन में लक्ष्मी देवी की फोटो

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 22 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST
  • पीएम मोदी के संग ​छपी है तस्वीर 
  • किराए के मकान में रहती हैं लक्ष्मी 
  • विज्ञापन में मिला घर, हकीकत में नहीं

पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बहू बाजार इलाके की रहने वाली लक्ष्मी देवी की फोटो अचानक अखबार में छपती है. लोगों ने जब लक्ष्मी देवी को इसके बारे में जानकारी दी, तो वे घबरा गईं. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि ये तस्वीर किसने और कब ली. इस तस्वीर में दावा किया गया था कि लक्ष्मी देवी को पीएम आवास योजना के तहत घर मिला है.

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लक्ष्मी देवी की ये तस्वीर 25 फरवरी को लगभग सभी अखबारों में छपी. दरअसल उनकी ये तस्वीर पीएम आवास योजना के तहत मिलने वाले आवास के लाभार्थियों को लेकर दिए गए विज्ञापन की थी. इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी बड़ा फोटो लगा हुआ था. साथ ही लक्ष्मी देवी के हवाले से लिखा गया कि वे अपना घर पाकर बेहद खुश हैं. लेकिन जब इस पूरे मामले की आजतक ने जांच पड़ताल की, तो सच्चाई हैरन कर देने वाली सामने आई है.  

कोलकाता की लक्ष्मी देवी को विज्ञापन में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिला लेकिन हकीकत में रहती है किराए के घर में.

— AajTak (@aajtak)

आजतक की टीम कोलकाता के बहू बाजार इलाके में पहुंची, जहां लक्ष्मी देवी रहती हैं. लक्ष्मी देवी से जब बातचीत हुई, तो उन्होंने बताया कि वे यहां ए​क किराए के मकान में रहती हैं. उनके परिवार में छह सदस्य हैं. 500 रुपये भाड़े पर लिया गया ये मकान इतना छोटा है कि परिवार के सभी सदस्य इसमें ठीक से रह भी नहीं पाते हैं. उन्होंने बताया कि पीएम आवास योजना के तहत उन्हें मकान मिलना तो दूर, उन्हें इस मामले में कोई जानकारी भी नहीं है. 

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लक्ष्मी देवी ने बताया कि उनकी ये तस्वीर कब ली गई और किसने ली इस बारे में भी उन्हें कुछ पता नहीं है. हां, इतना जरूर बताया कि ये तस्वीर बाबू घाट की है, जहां वे काम कर रही थीं. जब उनसे पूछा कि इस बारे में किसी से बात नहीं की तो उन्होंने बताया कि हम पढ़े लिखे नहीं हैं. अखबार में फोटो आने से ही डर गए थे, इसलिए किसी से भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं ली. 

 

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