थिरुथुराईपूंडी (विधानसभा क्षेत्र संख्या 166) कावेरी डेल्टा क्षेत्र के केंद्र में स्थित एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है, जो अपनी मजबूत कृषि प्रधान पहचान और जमीनी स्तर के राजनीतिक सक्रियता की लंबी परंपरा के लिए जानी जाती है. यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और यहां परंपरागत रूप से द्रविड़ राजनीति का प्रभाव रहा है, जहां मुख्य मुकाबला
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच होता रहा है. इस क्षेत्र में चुनावी मुद्दों में ग्रामीण कल्याण, कृषि और सिंचाई हमेशा सबसे प्रमुख रहे हैं. यहां का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री पिरावी मरुंदेश्वरर मंदिर है, जो 10वीं सदी का भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है और स्थानीय आस्था का केंद्र है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र काफी खास है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में SC समुदाय के कृषि मजदूर रहते हैं, जिनका चुनावी परिणामों पर बड़ा प्रभाव पड़ता है. यहां की राजनीति अक्सर किसान आंदोलनों और ग्रामीण मजदूर संगठनों से प्रभावित होती है. इसके अलावा कृषि सहकारी समितियां और स्थानीय पंचायत नेतृत्व भी चुनावी माहौल को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां चुनावी प्रचार और वोटिंग का आधार मुख्य रूप से सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और सिंचाई से जुड़े मुद्दे होते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा बेल्ट में आता है, जहां मुख्य रूप से धान की खेती होती है. यहां की जमीन को कावेरी नदी की शाखाओं (डिस्ट्रिब्यूटरी) और नहरों से सिंचाई मिलती है, जिससे खेती को सहारा मिलता है. सड़क मार्ग से यह क्षेत्र तिरुवारुर, नागपट्टिनम और मन्नारगुडी जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है. यह एक अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र है, जहां गांवों की घनी आबादी है और लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर करती है. साथ ही यह इलाका समुद्री तट (कोस्टल डेल्टा) के पास होने के कारण यहां के लोगों की जीविका पर कृषि और मछली पालन दोनों का असर देखा जाता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) में श्री पिरावी मरुंदेश्वरर मंदिर, श्री मुल्लाची मारियम्मन मंदिर, थिरुथुराईपूंडी शहर जो, प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र है, और वे कैनाल बेल्ट वाले गांव शामिल हैं जहां किसान मुद्दे राजनीतिक चर्चा का मुख्य केंद्र होते हैं. इसके अलावा SC बहुल ग्रामीण इलाके, बाजार कस्बे, परिवहन केंद्र और समुद्र के पास स्थित गांव भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां सबसे अहम सवाल कावेरी नदी के पानी की आपूर्ति और नहरों की देखभाल, कृषि मजदूरों की मजदूरी और रोजगार की स्थिरता, फसलों के उचित दाम और किसानों की आय सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे सड़क और पेयजल, और शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़े होते हैं.
मतदाताओं के रुझान को देखें तो यहां के लोग सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के प्रति काफी संवेदनशील रहते हैं. खेती की स्थिति सीधे तौर पर वोटिंग के फैसले को प्रभावित करती है. मतदाता अपने क्षेत्र के उम्मीदवार की पहुंच, उपलब्धता और जमीनी जुड़ाव को बहुत महत्व देते हैं. साथ ही वे राज्य सरकार के कामकाज, खासकर डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को ध्यान से देखते हैं. यहां चुनावी नतीजे अक्सर SC समुदाय और ग्रामीण किसानों के वोटों के एकजुट होने पर निर्भर करते हैं.