करीब एक साल बचे हैं जब उत्तर प्रदेश में बड़ा चुनावी घमासान चल रहा होगा. लेकिन उसकी जमीन अभी से तैयार होने लगी है. उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव को लेकर इस वक्त नरेंद्र मोदी 'नया यूपी' वाले नारे के साथ रणनीति बनाने में जुट चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार शाम को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. आज योगी आदित्यनाथ की ये चौथी मुलाकात है. सुबह वह प्रधानमंत्री से मिले. फिर बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा, कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले. इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की.
सख्त कानून व्यवस्था, अपराधियों में भय, जनता को सुरक्षा का अहसास, सड़क कनेक्टिविटी का विकास, 'जय श्री राम' और 'सनातन की जय' के बीच योगी आदित्यनाथ 2027 की विजय साधना में जुट चुके हैं. इसी से जुड़ी अहम मुलाकात और बातचीत करने सीएम योगी राम मंदिर की रेप्लिका लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे. राम मंदिर के संपूर्ण होने पर धर्म ध्वजारोहण किया जा चुका है. सवाल है कि क्या इसी तरह उत्तर प्रदेश में 2027 का विजय ध्वज भी मोदी-योगी मिलकर लहरा पाएंगे, जहां चुनाव में अब एक साल का वक्त ही बाकी है.
यूपी को लेकर रणनीति तैयार करने में जुटे मोदी-योगी
मुख्यमंत्री गुलाबी मीनाकारी से बने राम मंदिर के मॉडल को लेकर प्रधानमंत्री से मुलाकात करने पहुंचे. चांदी के इस राम मंदिर मॉडल को वाराणसी के कलाकार ने बनाया है. इस मुलाकात के बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया. आपका पाथेय 'नए उत्तर प्रदेश' की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करने हेतु सदैव नवीन ऊर्जा का संचार करता है. अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने हेतु हार्दिक आभार.'
इस पोस्ट में नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करने वाली बात पर जोर देना जरूरी है. क्योंकि जब पिछले महीने योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के भीतर दो नमूने वाला सियासी वार किया, तब और उससे पहले भी अखिलेश यादव बिना नाम लिए कभी इंजन की टकराहट और कभी ये लिखकर निशाना साधते रहे कि 'किसी को उम्मीद नहीं थी कि दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई यहां तक पहुंच जाएगी'.
अब योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ये लिखना कि 'आपका पाथेय 'नए उत्तर प्रदेश' की विकास यात्रा के लिए नई ऊर्चा का संचार करता है', साफ कर देता है कि मोदी-योगी ने यूपी की रणनीति तय करनी शुरु कर दी है.
कैसा होगा बीजेपी का 'नया उत्तर प्रदेश'?
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योगी आदित्यनाथ के साथ बीजेपी नए उत्तर प्रदेश की बात करती है. तो वो 'नया उत्तर प्रदेश' का नारा 2027 में कैसा दिखेगा, इसे लेकर तीन बातें पता चलती हैं. धर्म यानी जहां राम मंदिर का काम पूरा हो चुका है. अब बीजेपी यूपी में विराट हिंदू सम्मेलन की तैयारी कर रही है. दूसरा है विकास, आगे आने वाले वक्त में जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होनी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कई कार्यक्रमों के लिए प्रधानमंत्री का वक्त चाहते हैं जिसमें जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल है. तीसरा है, सत्ता-संगठन में जाति संतुलन यानी कैबिनेट विस्तार में जाति-क्षेत्र के आधार पर ऐसे चेहरे चुनना जिससे यूपी को साधा जा सके.
उत्तर प्रदेश में अभी कुल 54 मंत्री हैं. छह मंत्री पद खाली हैं. लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार जब होगा तो केवल छह पद की बात नहीं है. बदलाव बड़े संदेश के साथ हो सकता है, जिसमें जातियों के साथ ही क्षेत्र का संतुलन साधा जाना है. ब्राह्मण, दलित, ओबीसी वर्ग को रणनीतिक संदेश देना है. मुख्यमंत्री पद से लेकर बीजेपी अध्यक्ष पद तक पूरब के हिस्से में होने की वजह से पार्टी पश्चिम को भी साधना चाहती है.
कानून व्यवस्था पर खास फोकस
'21वीं सदी के नए भारत में नया उत्तर प्रदेश', ये शब्द जब खुद प्रधानमंत्री प्रयोग करते हैं तो फिर इसे मजबूत करने के लिए योगी आदित्यनाथ का सबसे ज्यादा फोकस कानून व्यवस्था पर रहता है. योगी सरकार में 'नए उत्तर प्रदेश' को लेकर चार तरीकों पर काम हो रहा है. अपराधियों में खौफ, अवैध कब्जे पर प्रहार, दंगा भड़काने वालों का इलाज और वोटर फर्जीवाड़े पर वार. इसका एक सबूत पिछले ही हफ्ते दिखा है. जब 24 घंटे के भीतर पुलिस ने मेजर की बीमार बेटी के घर को दबंगों के कब्जे से छुड़वाया.
ऐसे ही एनकाउंटर में जब सुल्तानपुर में एक लाख का इनामी बदमाश मारा गया तो उन परिवारों ने लड्डू बांटा जिनके घर में अपराधियों का खौफ था. ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के दम पर ही बीजेपी 2027 में नए यूपी वाला नारा गढ़कर चुनावी मैदान में उतरेगी.
उत्तर प्रदेश में आगे पंचायत चुनाव भी होना है. चर्चा है कि या तो मकर संक्रांति के बाद मंत्रिमंडल विस्तार होगा या फिर पंचायत चुनाव के आसपास. अगर पंचायत चुनाव टला तो फिर मंत्रिमंडल विस्तार होली के करीब हो सकता है. अब एक साल का ही वक्त है. नए चेहरों को एक साल तो चाहिए ही ताकि वो सरकार के रोडमैप पर चलकर दिखा सकें.
आजतक ब्यूरो