ग्राउंड रिपोर्ट: पुडुचेरी में पूर्ण राज्य के दर्जा की मांग तेज, बेरोजगारी ने बढ़ाई सियासी गर्मी

पुडुचेरी के 2026 विधानसभा चुनाव में इस बार पूर्ण राज्य और बेरोजगारी सबसे बड़े मुद्दे बन गए हैं. छोटे फ्रांस के नाम से मशहूर इस केंद्र शासित प्रदेश में नेताओं और जनता का एक ही दर्द है, हर छोटी फाइल और बजट के लिए दिल्ली का मुंह ताकना. वहीं, चुनाव में अब डिज्नी वर्ल्ड और AI पार्क जैसे बड़े वादों के साथ नए खिलाड़ियों की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है.

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9 लाख वोटर तय करेंगे पुडुचेरी की नई तकदीर (Photo: ITG) 9 लाख वोटर तय करेंगे पुडुचेरी की नई तकदीर (Photo: ITG)

प्रमोद माधव

  • पुडुचेरी,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:33 PM IST

तमिल और फ्रांसीसी कल्चर वाले पुडुचेरी में 2026 के चुनाव की तैयारी पूरी है.  यहां के 9 लाख वोटरों के मन में इस बार दो ही बड़े सवाल हैं. पहला तो अपना पूरा हक, यानी पूर्ण राज्य का दर्जा और दूसरी युवाओं की दुखती रग बेरोजगारी. यहां गलियों में चर्चा यही है कि, कहने को तो हमारी अपनी चुनी हुई सरकार है, मुख्यमंत्री हैं, पर सच तो ये है कि एक छोटी सी फाइल भी आगे सरकाने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है. यही वो बड़ी वजह है जिसे लोग यहां के विकास में सबसे बड़ा बाधा मान रहे हैं.

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पुडुचेरी विधानसभा में कहने को तो 30 चुनी हुई और 3 नामांकित सीटें हैं, पर सच तो ये है कि सरकार के हाथ पूरी तरह बंधे हुए हैं. डीएमके विधायक सेंथिल कुमार बड़े ही बेबाक अंदाज में अपना दर्द सुनाते हैं. उनका कहना है कि जब तक पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का हक नहीं मिलता, तब तक यहां तरक्की का सूरज नहीं उगेगा. वो आगे कहते हैं, 'जब हम फ्रांसीसी शासन में थे, तब हमारे पास पूरी विधानसभा थी और अधिकार भी ज्यादा थे. पर भारतीय संघ में शामिल होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद हमारी विधानसभा बस नाम की रह गई है.' 

सेंथिल कुमार आगे बताते हैं कि असली दिक्कत कहां आती है. उनके मुताबिक, 'हालत ये है कि हमारे बिलों के 'कच्चे मसौदे' (ड्राफ्ट) तक को मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय का मुंह ताकना पड़ता है. हाल ही में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' बिल का ही उदाहरण देख लीजिए. इसे दिल्ली जाने, वहां से पास होने और वापस पुडुचेरी की जमीन पर उतरने में ही पूरे 4 साल का लंबा वक्त लग गया. अब आप ही सोचिए, जहां कानून बनाने की प्रक्रिया ही इतनी सुस्त और ढीली हो, वहां विकास की रफ्तार आखिर कैसे बढ़ेगी?'

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सत्ताधारी एनआर कांग्रेस के मंत्री लक्ष्मी नारायणन का तो यहां तक कहना है कि उनकी पार्टी के वजूद की बुनियाद ही 'स्टेटहुड' की मांग पर टिकी है. मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने कांग्रेस का हाथ इसीलिए छोड़ा था ताकि इस मुद्दे को अंजाम तक पहुंचा सकें. नारायणन बताते हैं, '1963 से ही हमारी सरकार की ताकत को सीमित कर दिया गया है. उपराज्यपाल (LG) जब चाहते हैं, चुनी हुई सरकार के फैसलों पर कैंची चला देते हैं. सबसे अजीब बात तो ये है कि हम अपना बजट तक केंद्र की मर्जी के बिना जनता के सामने नहीं रख सकते. बजट जैसा गोपनीय कागज भी पहले दिल्ली के मंत्रालयों में जाकर चेक होता है.'

इंडिया टुडे से खास बातचीत में मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने भी अपनी जिद दोहराई. उन्होंने साफ कहा कि राज्य का दर्जा लेने की उनकी मांग जारी रहेगी, 'हम बार-बार भारत सरकार से अपना हक मांगते रहेंगे क्योंकि बिना पूरी पावर के प्रशासन चलाना नामुमकिन सा हो गया है.' उधर, कांग्रेस सांसद वैथिलिंगम ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए चुटकी ली. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने तो पीएम के सामने भरी सभा में ये मांग रखी थी, पर वहां से कोई जवाब न मिलना बड़े दुख की बात है.

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बेरोजगारी का कड़वा सच

2026 के इस चुनावी अखाड़े में दूसरा सबसे बड़ा कांटा बेरोजगारी है. पुडुचेरी में पढ़ाई-लिखाई के केंद्र तो गली-गली में हैं, पर डिग्रियां लेकर निकलने वाले युवाओं के हाथ खाली हैं. विधायक सेंथिल कुमार का कहना है, 'आज के लड़कों को 50 हजार से 1 लाख वाली नौकरियां चाहिए, पर यहां सिर्फ छोटे-मोटे काम ही बचे हैं. हमें हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग, दवा कंपनियां और सेमीकंडक्टर जैसे बड़े सेक्टर यहां लाने होंगे तभी बात बनेगी.' कांग्रेस भी पीछे नहीं है, उन्होंने अपने मेनिफेस्टो में नौकरी का पूरा रोडमैप देने का दावा किया है.

इस चुनाव में एक नए खिलाड़ी की भी एंट्री हुई है. उनका नाम है जोस चार्ल्स मार्टिन. एनडीए के साथ मिलकर दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे मार्टिन का विजन बड़ा हाई-टेक और फिल्मी है. वो युवाओं को लुभाते हुए कहते हैं, 'हम पुडुचेरी को 'डिज्नी वर्ल्ड' और 'यूनिवर्सल स्टूडियो' जैसा बनाएंगे. यहां AI पार्क, फिल्म सिटी और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देकर रोजगार की बाढ़ ला देंगे. पुडुचेरी को हेल्थ और वेलनेस का वर्ल्ड क्लास हब बनाना ही हमारा लक्ष्य है.'

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