तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने AIADMK में वापसी की इच्छा जताई है, लेकिन पार्टी के मौजूदा नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. विधानसभा चुनाव से पहले इस बयानबाज़ी को अहम सियासी संकेत माना जा रहा है.
थनी जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओ. पन्नीरसेल्वम ने पलानीस्वामी को 'बड़ा भाई' बताते हुए कहा कि मौजूदा हालात में AIADMK का एकजुट होना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी अपने गठबंधन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है, लेकिन वे AIADMK के भीतर अपने अधिकारों की लड़ाई कानूनी तौर पर जारी रखेंगे.
पन्नीरसेल्वम ने कहा, “मैं AIADMK के साथ एकजुट होने के लिए तैयार हूं. टीटीवी दिनाकरण मुझे स्वीकार करने को तैयार हैं. सवाल यह है कि क्या EPS तैयार हैं?”
पन्नीरसेल्वम ने यह भी संकेत दिया कि अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) के प्रमुख टीटीवी दिनाकरण उनकी AIADMK में वापसी की राह आसान कर सकते हैं. गौरतलब है कि दिनाकरण की पार्टी AMMK हाल ही में फिर से एनडीए में शामिल हुई है. दिनाकरण ने भी इस सप्ताह कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि पन्नीरसेल्वम अंततः एनडीए का हिस्सा बनेंगे.
हालांकि, पलानीस्वामी ने पन्नीरसेल्वम की वापसी की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि पार्टी में पन्नीरसेल्वम के लिए कोई जगह नहीं है. यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा AIADMK के बिखरे गुटों को एकजुट कर DMK के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है.
बता दें कि पन्नीरसेल्वम और पलानीस्वामी के बीच टकराव की जड़ें 2016 में जयललिता के निधन के बाद शुरू हुईं. नेतृत्व को लेकर चली खींचतान के बाद पन्नीरसेल्वम ने पलानीस्वामी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, जिसके चलते उन्हें 2022 में AIADMK से निष्कासित कर दिया गया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पन्नीरसेल्वम की AIADMK या NDA में वापसी होती है तो इसका असर तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में दिख सकता है. पन्नीरसेल्वम मुक्कुलथोर (थेवर) समुदाय से आते हैं, जो राज्य की आबादी का करीब 12 प्रतिशत है और चुनावी गणित में अहम भूमिका निभाता है.
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