पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर मतदान से ठीक पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बढ़ते तनाव के बीच निर्वाचन आयोग ने फाल्टा के संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया है. उन्हें पुरुलिया मुख्यालय भेजा गया है, जबकि उनकी जगह रम्या भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है.
आयोग ने आदेश दिया है कि यह बदलाव तुरंत लागू किया जाए और उसी दिन शाम तक अनुपालन रिपोर्ट भेजी जाए. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब फाल्टा सीट पर प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनावी माहौल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
कब शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा, जो निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक के रूप में तैनात हैं, तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पहुंचे. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
सिंघम और पुष्पा का जिक्र
वीडियो में अजय पाल शर्मा यह कहते नजर आए कि यदि मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई होगी. उनके इस बयान के बाद जहांगीर खान ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.'
जहांगीर खान ने आरोप लगाया कि अधिकारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और उन पर तथा उनके समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती. इस घटना के बाद फाल्टा में तृणमूल समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश की जा रही है.
महिला ने लगाया घर में घुसने का आरोप
विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक महिला ने फाल्टा थाने में शिकायत दर्ज कराई. महिला ने आरोप लगाया कि 27 अप्रैल की रात कुछ लोग, जिन्होंने खुद को सीआरपीएफ कर्मी बताया, बिना किसी वैध दस्तावेज के उसके घर में घुस आए.
महिला का कहना है कि वे उसके पति को पकड़ने आए थे. विरोध करने पर उसे धक्का दिया गया, मारपीट की गई और अभद्र व्यवहार किया गया. उसने छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया.
शिकायत में यह भी कहा गया कि परिवार पर भाजपा के पक्ष में वोट देने का दबाव बनाया गया. कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि आदेश नहीं माना गया तो 4 मई के बाद नुकसान पहुंचाया जाएगा. महिला ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और चुनाव पर्यवेक्षक की भूमिका की भी जांच की मांग की है.
मतदान से पहले फाल्टा अब हाई-वोल्टेज चुनावी रणभूमि बन चुका है. इस पूरे विवाद ने चुनावी निष्पक्षता, प्रशासनिक भूमिका और मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
अनुपम मिश्रा