मन्नाडीपेट केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी का एक विधानसभा क्षेत्र है, जो मन्नाडीपेट कम्यून पंचायत के एक हिस्से को कवर करता है और यह पुडुचेरी लोकसभा क्षेत्र का भाग है. यह पुडुचेरी के कुल 11 एन्क्लेव में से 3 एन्क्लेव से मिलकर बना है. यह मुख्य एन्क्लेव में स्थित सेल्लीपट्टू भी मन्नाडीपट्टू कम्यून का हिस्सा है. मन्नाडीपट्टू, नेट्टापक्कम कम्यून के साथ
मिलकर केंद्र शासित प्रदेश की पश्चिमी सीमा बनाता है.
2001 की जनगणना के अनुसार मन्नाडीपट्टू की जनसंख्या लगभग 9,50,289 थी, जिसमें पुरुष और महिलाएं समान अनुपात में थीं. यहां औसत साक्षरता दर 81.49 प्रतिशत थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 88.89 प्रतिशत और महिला साक्षरता 74.13 प्रतिशत थी, जबकि लगभग 10 प्रतिशत आबादी 6 वर्ष से कम आयु की थी.
मन्नाडीपट्टू पुडुचेरी शहर से लगभग 24 किलोमीटर दूर स्थित है और यह पुडुचेरी-तिरुक्कनूर (मन्नाडीपट्टू के माध्यम से) बस मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है. यहां से दो आरसी सड़कें गुजरती हैं- फ्रंटियर रोड (RC-21) और मन्नाडीपट्टू–तिरुक्कनूर रोड (RC-32), जिनमें से फ्रंटियर रोड का अंत मन्नाडीपट्टू में होता है.
मन्नाडीपट्टू से 5 किलोमीटर दूर तिरुवक्करई में स्थित चंद्रशेखरर मंदिर है, जिसकी प्रशंसा संत संबंदर ने थेवारम में की है. इसी क्षेत्र में स्थित नेशनल फॉसिल पार्क, तिरुवक्करई भारत का पहला जीवाश्म उद्यान है, जिसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित किया जाता है. यहां 247 एकड़ क्षेत्र में नौ अलग-अलग एन्क्लेव में लकड़ी के जीवाश्म फैले हुए हैं.
2021 के पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में मन्नाडीपेट सीट पर भारतीय जनता पार्टी के ए. नमस्सिवायम ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के ए. कृष्णन को 2750 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की थी. चुनाव के बाद उपराज्यपाल द्वारा गैर-निर्वाचित विधायकों को फिर से भाजपा को नामित किए जाने से पार्टी नामित सदस्यों के माध्यम से एक-तिहाई सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई.
मन्नाडीपेट की प्रमुख समस्याओं में बुनियादी ढांचे, जल एवं कचरा प्रबंधन, तालाब संरक्षण (तिरुवंदारकोइल), ठोस कचरा उपविधियों के क्रियान्वयन, पुडुचेरी-तमिलनाडु की मिश्रित सीमा से जुड़े भूमि विवाद तथा राजनीतिक समन्वय की कमी से जुड़ी हैं, जिनका प्रभाव स्थानीय शासन और कृषि, बिजली व शिक्षा जैसे क्षेत्रों के विकास पर पड़ता है.