.... जब मिले दूसरों को जीवनदान तो क्यों न करें अंगदान

एक दिन हम सभी को इस दुनिया को अलविदा कह कर चले जाना है. लेकिन जाते-जाते अगर हम किसी दूसरे को जिंदगी दे जाएं तो इससे बड़ा पुण्य का काम कोई हो नहीं सकता.

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World Organ Donation Day 2017 World Organ Donation Day 2017

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 9:02 AM IST

अपने अंगदान से दूसरे को जीवन देकर कुछ इंसान भगवान बन जाते हैं. 13 अगस्त को विश्वभर में अंगदान दिवस मनाया जा रहा है. अंगदान का मतलब है किसी शख्स से स्वस्थ अंगो और टिशूज को लेकर इन्हें किसी दूसरे जरूरतमंद शख्स में ट्रांसप्लांट कर दिया जाना. इस तरह के अंगदान से किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है. अंगदान मृत्यू के बाद और कभी-कभी जीवित भी होता है. लेकिन अंगदान के मामले हमारे देश में जागरूकता की कमी और पिछड़ापन साफ दिखाई पड़ता है.

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जानिए आपका अंगदान, दूसरों की जिंदगी के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है और जानें इससे जुड़े जरूरी तथ्यों के बारे में

1. देश में हर साल 1.5 लाख किड़नी की जरूरत पड़ती है, जबकि 3 हजार मुहैया हो पाती है.

2. मरीजों को 25 हजार नए लीवर की आवश्यकता होती है लेकिन हासिल हो पाते है सिर्फ 800.

3. 60 लाख नेत्रहीनों लोगों को आंखों की जरूरत होती है, लेकिन 22, 384 लोगों को ही हासिल हो पाती है.

अंगदान दो तरह से किए जा सकते हैं

- लिविंग डोनर: जीवित रहते हुए कोई भी व्यक्ति शरीर के कुछ अंग जैसे किडनी, बोन मैरो (अस्थि मज्जा), लिवर और फेफड़े का कुछ हिस्सा परिजनों को डोनेट कर सकता है.

- ब्रेन डेड: इसे केडेवर डोनर भी कहते हैं। 18 साल से कम उम्र के युवा पैरेंट्स की अनुमति और इससे अधिक उम्र होने पर अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। ब्रेन डेड घोषित होने पर किडनी, लीवर, फेफड़े, पैन्क्रियाज, ओवरी, गर्भाशय, आंखें, हड्डियां और त्वचा का दूसरे शरीर में ट्रांसप्लांट करते हैं.

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अंगदान के मामले है देश है काफी पीछे

सिंगापुर, बेल्जियम और स्पने में 10 लाख में से 20 से 40 लोग, अमेरिका, जर्मनी और नीदरलैंड में 10 लाख में से 10 से 20 लोग अंगदान करते हैं. जबकि भारत में प्रति 10 लाख में से ये आंकड़ा 0.16 लोगों का है.

भारत में अंगदान न करने के पीछे दिए जाते है कई तर्क

जैसे:- अगर मरीज अंगदानकर्ता है तो उसकी जान बचाने का प्रयास कम किया जाता है.

- हमारा धर्म इसकी इजाजत नहीं देता.

- अंग प्रत्यर्पण की कीमत, दानकर्ता के परिवार को चुकानी पड़ती है.

- अंगदान के बारे में जागरुकता की कमी.

फल-फूल रहा है अंगदान के नाम पर गैर-कानूनी धंधा

हर घंटे 10 हजार अंग अवैध तरीके से खरीदे और बेचे जा रहे हैं. दुनिया में अंग विक्रय के अवैध धंधे का 75% हिस्सा किडनी से संबंधित होता है. वहीं तस्कर, अवैध ढंग से किडनी बेचने का कारोबार कर, 2 लाख डॉलर की कमाई करते हैं.

हर अंग जरूरी है

आपको बतादें प्राकृतिक मौत में अंगदान सिर्फ किडनी और आंखों तक सीमित नहीं है. बल्कि हृदय वाल्व, त्वचा, हड्डियां, नसें, और धमनियां भी दान की जा सकती हैं. इसके अलावा ब्रेन डेथ के बाद लिवर, फेफड़ें, अग्न्याशय, गर्भाशय, हाथों और पैरों की उंगलियां भी दान देना संभव है.

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नहीं है उम्र की कोई सीमा

दानकर्ता की उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ता. 100 साल से ज्यादा के लोग भी अपनी कॉर्निया और त्वचा दान कर सकते हैं.

- 70 साल से ज़्यादा उम्र के लोग: किडनी और लिवर

- 50 साल से ज़्यादा उम्र के लोग: हद्य और फेफड़े

- 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोग: हृदय वाल्व

सबका वक्त निश्चित

अंग प्रत्यर्पण के लिए एक समय सीमा तय होती है, जिसका ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है.

- मौत के 6 घंटे बाद हृदय और फेफड़े

- मौत के 12 घंटे बाद लिवर

- मौत के 24 घंटे बाद अग्न्याशय

- मौत के 48 घंटे बाद किडनी का प्रत्यर्पण किया जा सकता है.

अगर आप किसी को जीवनदान देने के लिए अंगदान के लिए तैयार है तो अंगदान की पहली शर्त जान लें. अंगदान के लिए व्यक्ति का स्वस्थ होना सबसे महत्वपूर्ण है. साथ ही वह एचआईवी, डायबिटीज, कैंसर, गंभीर संक्रमण, किडनी और हृदय रोगों से पीडि़त न हो.

 

 

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