न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है? जानें किसानों के लिए कैसे है फायदेमंद

केंद्र सरकार ने रबी फसलों के नए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (MSP) को मंजूरी दे दी है. ये किसानों के लिए बड़ा तोहफा है, आइए जानें क्या होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य. कैसे किसानों को मिलेगा इससे फायदा.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2020,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

केंद्र सरकार ने देश के किसानों को एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का बड़ा तोहफा दिया है. सरकार ने रबी की फसलों के नए न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दे दी है. सूत्रों के अनुसार सरकार ने गेंहू के एमएसपी में 85 रुपये की बढ़ोतरी की है. वहीं, बाजरे के दाम में भी 85 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये से बढ़कर 1925 रुपये हो गया है. आइए जानते हैं MSP, ये क्या होता है और किसानों को इसका फायदा कैसे मिलता है.

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बता दें कि किसानों को उसकी फसल का लागत से ज्यादा मूल्य मिले, इसके लिए भारत सरकार देशभर में एक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है. खरीदार नहीं मिलने पर सरकार MSP पर किसान से फसल खरीद लेती है. इसकी पूरी प्रक्र‍िया कुछ इस प्रकार है.

अगर देश में फसल का उत्पादन बढ़ता है तो बिक्री मूल्य कम हो जाता है. कृषि उत्पादों के मूल्यों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार मुख्य फसलों का एक न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करती है. जो एक सत्र के लिए मान्य होता है.

एमएसपी निर्धारित करते वक्त उत्पादक की लागत, मूल्यों में परिवर्तन, इनपुट-आउटपुट मूल्य में समानता, मांग-आपूर्ति जैसी कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है.

कृषि जानकारों का मानना है कि एमएसपी तय करने की प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है. ये कारण खेती, जलवायु, भौगोलिक, मिट्टी आदि की विविधता से उपजती हैं. खेतिहर मजदूरों की भी इस प्रक्रिया में ज्यादा भागीदारी नहीं है.

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किसानों के लिए एमएसपी के फायदों की बात करें तो इसका सीधा फायदा ये है कि इससे अनाज की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है. न्यूनतम मूल्य मिलने की गारंटी होती है. आसान भाषा में कहें तो सरकार द्वारा इसके जरिए किसानों को बाजार में अपनी फसल का न्यूनतम मूल्य हर हाल में मिलना तय किया जाता है.

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