लोकतंत्र की नींव है पंचायती राज सिस्टम, राजीव गांधी ने ऐसे किया मजबूत

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में पंचायती राज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया. जानें, ये कब और कैसे लागू किया गया था.

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राजीव गांधी ने पंचायती राज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार करवाया राजीव गांधी ने पंचायती राज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार करवाया

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 6:48 PM IST

भारत में हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है. ये दिन भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के पारित होने का प्रतीक है, जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था. आपको बता दें, देश में पंचायती राज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी लेकर आए थे. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

कैसे आया था पंचायती राज

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आपको बता दें, 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज की मजबूत नींव देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने रखी थी, उस पर अधिकारों की एक शानदार इमारत खड़ी करने का काम राजीव गांधी जी ने किया था.

पंचायती राज से जुड़ी संस्थाएं मजबूती से विकास कार्य कर सकें, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने देश में पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त किया. राजीव गांधी का मानना था कि जब तक पंचायती राज व्यवस्था सफल नहीं होगी, तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता.

उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायती राज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया. राजीव गांधी की सरकार की ओर से तैयार 64वें संविधान संशोधन विधेयक के आधार पर तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने 73वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराया. 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू हुआ. जिससे सभी राज्यों को पंचायतों के चुनाव कराने को मजबूर होना पड़ा.

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महात्मा गांधी ने क्या कहा था?

पंचायत भारतीय समाज की बुनियादी व्यवस्थाओं में से एक रहा है. महात्मा गांधी ने भी पंचायतों और ग्राम गणराज्यों की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि गांव की पंचायत के पास अधिकार होने चाहिए. गांधी के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से ही 1992 में संविधान में 73वां संशोधन किया गया और पंचायती राज संस्थान का कॉन्सेप्ट पेश किया गया. बता दें, स्वतंत्रता के बाद से, समय-समय पर भारत में पंचायतों के कई प्रावधान किए गए और 1992 के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के साथ इसको अंतिम रूप दे दिया गया था.

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