इस IAS अॉफिसर ने किया था कभी वेटर का काम, 7वें प्रयास में बने IAS

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों में कड़ी मेहनत करने की क्षमता के साथ-साथ धैर्य का होना बहुत ज्यादा जरूरी है. जानिए ऐसे ही एक उम्मीदवार के बारे में जिसे 7वीं बार में सफलता हासिल हुई थी.

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Success story of an IAS officer K. Jayaganesh (photo from facebook) Success story of an IAS officer K. Jayaganesh (photo from facebook)

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2016,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

तमिलनाडु के एक गरीब परिवार से आने वाले के जयागणेश ने अपने सपने को पूरा करने के लिए दूसरी सभी चीजों को पीछे छोड़ दिया. अपने छह प्रयासों में सिविल सर्विस की परीक्षा पास नहीं करने के बावजूद भी उन्होंने आशा का दामन नहीं छोड़ा.

अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने चेन्नई में वेटर की नौकरी की. लेकिन तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा भी पास की.

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जानिए के जयागणेश की कहानी:
इनके पिता गरीब थे. लेदर फैक्टरी में सुपरवाइजर का काम करके हर महीने सिर्फ 4,500 तक ही कमा पाते थे. चार भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के कारण घर चलाने का जिम्मा भी इन्हीं पर था. जयागणेश पढ़ाई में अच्छे थे. 12वीं में इन्होंने 91 फीसदी मार्क्स हासिल किया था. इसके बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी. इंजीनियरिंग की डिग्री मिलने के बाद इन्हें 25,000 प्रति महीना पर एक नौकरी भी मिल गई. लेकिन जल्द ही उन्हें यह एहसास होने लगा कि शिक्षा उनके गांव के बच्चों के लिए भी बेहद जरूरी है. उनके गांव के ज्यादातर बच्चे बड़े होकर रिक्शा चलाने का ही काम कर पाते थे.

गांव को बदलने का आया ख्याल:
इसी दौरान उन्हें पता चला कि वह ला सकते हैं अगर वो कलक्टर बन जाए. इसलिए उन्होंने अपना जॉब छोड़ना बेहतर समझा और सिविल सर्विस की तैयारी करने शुरू कर दी. जल्द ही किसी से भी मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण रास्ता कठिन दिखने लगा. अपने पहले दो प्रयास में तो ये प्रारंभिक परीक्षा भी नहीं पास कर पाए.

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बाद में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के जगह सोशियोलॉजी को चुना. इसका भी फायदा नहीं हुआ और यह तीसरी बार में भी फेल हो गए. तैयारी करने के लिए ये चेन्नई चले गए. वहां एक सिनेमा हॉल के कैंटीन में काम करने लगे. काफी करने के बावजूद पांचवी बार में भी सफलता हासिल नहीं हुई. आगे पढ़ाई करने के लिए पैसे की कमी बहुत ज्यादा आड़े आ रही थी. अब उन्होंने कराने वाले एक कोचिंग में सोशियोलॉजी पढ़ाना शुरू कर दिया. अपने छठे प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा तो पास कर ली लेकिन इंटरव्यू पास करने से रह गए.

इस बीच वो निराश भी रहने लगे थे लेकिन दिल से बनने का ख्याल नहीं निकाल पा रहे थे. जब वे 7वीं बार परीक्षा में बैठे तो प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भी पास कर गए. उन्हें 7वीं बार में 156वां रैंक मिली. इनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर आप सिविल सर्विस परीक्षा पास करना चाहते हैं तो आपमें धैर्य और मेहनत करने की शक्ति जरूर होनी चाहिए.

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