केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 32 Private medical college पर बैन लगा दिया है. बैन किए गए कॉलेज दो साल तक किसी नए स्टूडेंट का एडमिशन नहीं ले सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को मंजूरी दे दी है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन कॉलेजों की 2 करोड़ सिक्योरिटी राशि को भी जमा कर लिया है. बैन लगाने के बावजूद मंत्रालय ने 4,000 अंडरग्रजुएट स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पूरी करने की मंजूरी दे दी है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक health
and family welfare के सेक्रेटरी
अरुण सिंह का कहना है कि सुरक्षाओं की कमी
को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है. लेकिन जो स्टूडेंट्स अभी पढ़
रहे हैं, उनकी पढ़ाई पर किसी भी प्रकार का असर नहीं होगा.
आंकड़ों के मुताबिक भारत में कई मेडिकल कॉलेज विवादों में फंस चुके हैं.
कॉलेजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कई तरह के
मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार हुआ है.
जिसके चलते मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में काफी गिरावट आई है.
मई 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चिकित्सा परिषद में भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए, पूर्व मुख्य न्यायाधीश एमएल लोढ़ा की अध्यक्षता वाली three-member Oversight Committee (OC), नियुक्त की, जो इस तरह के अध्ययन को नियंत्रित करता है.
बता दें कि जिस समय कोर्ट पैनल गठित किया
था, तभी मेडिकल काउंसिल ने 109 नए मेडिकल
कॉलेजों किया था जिन्हें साल 2016 में मेडिकल छात्रों
के एडमिशन के लिए आवेदन किया था.
लेकिन 109 कॉलेज मे से केवल 17 कॉलेज को अनुमति
दी गई.
पर जब दोबारा एप्लाई करने के बाद 34 अन्य कॉलेज को
अनुमति दे दी गई.
वहीं ज्यादातर प्राइवेट कॉलेज ने इस बैन को अवैध बताया है. क्योंकि उनका कहना है कि पिछले साल 34 कॉलेज को एडमिशन के लिेए अनुमति दी थी. लेकिन अब काउंसिल ने 32 कॉलेज को बैन कर दिया है. इन सब से कई स्टूड़ेंट्स का भारी नुकसान हो सकता हैं. जिसका असर उनके भविष्य पर पड़ेगा.
वंदना भारती