तो... इसलिए कहा जाता है डॉ. भीमराव अम्बेडकर को दलितों का मसीहा

दलितों के उत्‍थान, संविधान और नागरिकों में समानता लाने के लिए जीवन न्यौछावर करने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर का आज जन्मदिन हैं. जानते है उनसे जुड़ी कुछ बातें...  

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 Ambedkar Jayanti Ambedkar Jayanti

मेधा चावला

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 3:28 PM IST

देश के संविधान को आकार देने वाले  डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का जन्म साल 14 अप्रैल 1891 में हुआ था. जानते हैं क्यों कहा जाता था इन्हें 'दलितों का मसीहा'

1. डाॅ. भीम राव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था. भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का भीमाबाई था.

2. डॉ. भीमराव अंबेडकर अपने माता-पिता की 14वीं संतान थे.

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3. विदेश जाकर अर्थशास्त्र डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले वह पहले भारतीय थे.

4. जब वह 1926 में भारत आए तब उन्हें मुंबई की विधानसभा का सदस्य चुना गया.


5. भारत के संविधान का मुख्य निर्माता उन्हें ही माना जाता हैं. वह आजाद देश के पहले कानून मंत्री बने.

6. साल 1990 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था.

7. उनके कुछ महान विचार हैं, जो वह कहा करते थे...

'जीवन लम्बा होने की बजाय महान होना चाहिए'

'हम सबसे पहले और अंत में, भारतीय हैं'

'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’

8. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने ही सबसे पहले छुआछूत, दलितों, महिलाओं और मजदूरों से भेदभाव जैसी कुरीति के खिलाफ आवाज उठाई.

9. साल 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया, जिसके कारण लाखों दलितों ने ऐसा किया.

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10. 6 दिसंबर 1956 को डाॅयबिटिज से पीड़ित होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई.

 

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