दिल्ली हाई कोर्ट ने CBSE को 12वीं के छात्रों की मार्कशीट की गड़बड़ियों को लेकर री-वेरिफिकेशन के आदेश दिए हैं. कोर्ट के कहने पर आंसर शीट की जांच के लिए छात्रों से ली गयी अंडरटेकिंग डिलीट करने के लिए भी सीबीएसई तैयार हो गया है.
इसके अलावा हाईकोर्ट ने सीबीएसई से भी कहा है कि वो चार दिन में मार्किंग स्कीम को वेबसाइट पर अपलोड करे.
अब होगा रि-वेरिफिकेशन
RE evaluation के बजाय अब री-वेरिफिकेशन करेगी सीबीएसई. ये लगभग RE evaluation से मिलता-जुलता ही होगा. यानि पूरी तरह से खत्म किया गया RE evaluation अब इस साल री-वेरिफिकेशन के रूप मे होगा.
कैसा होगा ये
री-वेरिफिकेशन फर्स्ट कम फर्स्ट बेसिस पर होगा. छात्रों को ऑनलाइन एप्लाई करना होगा. इस साल 2.47 प्रतिशत बच्चों ने री-वेरिफिकेशन के लिए के लिए एप्लाई किया था, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी ज़्यादा है.
कैसे कोर्ट पहुंचा मामला
12वी के स्टूडेंट्स ने सीबीएसई के री-इवैल्युएशन पॉलिसी को हटाने को चैलेंज करते हुए याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीबीएसई को अपनी गवर्निंग बॉडी और एग्जामिनेशन समिति के फैसले को सामने रखने का निर्देश दिया था जिसके बाद सीबीएसई स्टूडेंट से ली गयी उस अंडरटेकिंग को भी ख़त्म करने को तैयार हो गया है जिसमें स्टूडेंट से लिखवाया गया था कि वो मार्क्स के री-इवैल्युएशन के लिए कोर्ट मे याचिका नही लगा सकते.
क्यों नाराज हैं छात्र
CBSE के काफी स्टूडेंट को सभी विषयों में 80 प्रतिशत से अधिक स्कोर करने के बावजूद मैथ्स या किसी एक सब्जेक्ट में 50 या 60 नंबर मिले हैं. बड़ी तादाद में सामने आ रहे ऐसे मामलों से सीबीएसई की प्रोसेस पर सवाल खड़े हुए हैं. सीबीएसई अभी केवल वेरिफिकेशन कर रही थी जबकि री-इवैल्युएशन को पहले ही ख़त्म कर दिया गया था.
पूनम शर्मा