जिनकी रुचि पढ़ने में होती है वो तमाम परेशानियों के बावजूद पढ़ाई में आगे रहते हैं. इस बात को एक बार फिर सही साबित कर दिखाया है राघव चांडक ने.
कैंसर से संघर्ष कर रहे राघव ने ICSE की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95.8 फीसदी अंक हासिल किए हैं. लेकिन उनके लिए यह करना आसान काम नहीं था. वो कोलकाता के के छात्र हैं. कैंसर से पीड़ित होने के कारण स्कूल नहीं जा सके लेकिन घर पर रहकर ही उन्होंने इलाज के साथ पढ़ाई को जारी रखा.
राघव की पढ़ाई जारी रखने में उनके पेरेंट्स और टीचर्स का महत्वपूर्ण योगदान है. परीक्षा की तैयारी करते समय राघव इस स्थिति में नहीं थे कि वो अकेले चल भी सके. राघव के शिक्षकों ने उनके लिए नोट्स के इंतजाम किए. उन्होंने नोट्स बनाते समय इस बात का ध्यान रखा कि स्कूल से दूर राघव नोट्स को आसानी से समझ सकें. यही नहीं, उनके चचेरे भाई जो उनकी क्लास में ही पढ़ते हैं, उन्होंने भी नोट्स देकर राघव की मदद की.
राघव की सफलता पर उनके पिता का कहना है, 'अगर वो नियमित रूप से क्लास अटेंड करता तो इससे भी अच्छे मार्क्स हासिल कर सकता था. लेकिन उसकी बीमारी ने ऐसा होने नहीं दिया. अपने बेटे को है.'
अपनी सफलता का श्रेय राघव अपने पेरेंट्स, टीचर्स, फ्रेंड्स और डॉक्टर को देते हैं. फुटबॉल के शौकिन राघव आईआईटी ज्वॉइन करना चाहते हैं. उनकी को देखते हुए तो ऐसा ही लगता है कि वे अपने सपने को जरूर पूरा करेंगे.
स्नेहा